विजय कच्छप | कामडारा नशा व शराब को छोड़ते ही धीरे-धीरे गांव उरुगुटू की तस्वीर ऐसी बदली कि सरकारी सहायता और संसाधन के ही गांव में सालभर हरियाली छाए रहती है। इसका पूरा श्रेय ग्रामीणों को जाता है। उरुगुटू गुमला जिले के कामडारा प्रखंड क्षेत्र के रामतोलया पंचायत के अंतर्गत आता है। ग्रामीण भाकू कोनगाड़ी ने बताया कि लगभग 30 वर्ष पहले इस उरुगुटू गांव के इतिहास को देखा जाय तो लोग दिन-रात शराब व हंड़िया नशे में चूर रहते थे। लोगों की आर्थिक स्थिति खराब थी। शाम ढलते ही गांव में लड़ाई-झगड़ा शुरू हो जाता था, लेकिन इसी बीच वर्ष 1998 ई. में उसके घर पर एक पुत्री का जन्म हुआ। उसी दौरान गांव मे एक सज्जन व्यक्ति आए और उसने नशापान त्याग कर खेती के लिए उसे प्रोत्साहित किया। उसके बाद उसने मन लगाकर खेती की और अच्छा कमाई हुई। इसके बाद रहन-सहन और घर में बदलाव बदलाव आता देख गांव अन्य ग्रामीणों ने भी नशापान को त्याग कर खेतीबाड़ी में लग गए। नतीजा यह है कि आज की तारीख में गांव उरुगुटू में अपवाद के तौर पर एकाद व्यक्ति को छोड़ दिया जाय तो गांव मे कोई भी व्यक्ति नशा व शराब का सेवन नहीं करता है। ग्रामीणों का झुकाव खेती-बाड़ी में हुआ और सिंचाई के लिए पानी की चिंता होने लगी। सभी ने पोकला बरदानाला से गांव होते हुए बहने वाले एक नाला पर श्रम दान से विभिन्न स्थानों पर दर्जनों छोटे-छोटे बांध बना दिए। जिसके अब सालभर भर सब्जी व धान की खेती करते हैं। वहीं पानी का लबालब स्टोर रहने के कारण गांव के कुएं व जलाशय मे पानी की कमी नहीं है। चहुंओर हरियाली से गर्मी में भी गांव में राहत होती है। गांव के जोसेफ कोनगाड़ी, प्रभु सहाय, विनय कोनगाड़ी ने बताया कि फिलहाल गांव में नाला के किनारे श्रम दान से तीन किमी तक लगभग एक दर्जन बांध बने हैं। साल में दो बार धान की खेती होती है। सभी ग्रामीण खेती कर आत्मनिर्भर बनते जा रहे हैं। खेतों में उगी सब्जियां बाजारों पर बिकती हैं। किसान भानू कोनगाड़ी की पुत्री सुगन कोनगाड़ी ने बताया कि इस गांव मे सिर्फ अनुसूचित जनजाति के लोग रहते हैं। गांव में फिलहाल कुल 40 घर है। कुल आबादी दो सौ के आसपास है। इस गांव में शराब व नशा से नाता तोड़ने के बाद अब शिक्षा के प्रति लोग काफी जागरूक हो चुके हैं। गांव से फिलहाल कुल दो लोग सरकारी नौकरी कर रहे हैं। जिसमें आशीष कोनगाड़ी पुलिस बल मे चालक के पद पर है। वहीं गांव की एक युवती जोसफिन कोनगाड़ी धनबाद में रेलवे क्लर्क के पद पर पदस्थापित है। वही गांव का एक व्यक्ति गांव में सहायक शिक्षक के रूप मे कार्यरत है। सरकारी सुविधाओं का अभाव उरुगुटू में सरकारी सुविधाओं का घोर अभाव है। गांव मे सिर्फ तीन चापाकल है, परंतु वह भी मरम्मत के अभाव में खराब हैं। एक भी सामुदायिक भवन और चबूतरा नहीं है। गांव तक जानेवाली उखड़-खाबड़ कच्ची मार्ग पर बमुश्किल चार पहिया वाहन जाती है। ग्रामीणों की मांग है कि कम से कम गांव तक जानेवाली सड़क को अच्छी तरह से बना दिया जाएगा तो लोगों को आने जाने काफी सहुलियत होगी। इस गांव के अधिकतर किसान अब केसीसी लोन से दूर रहकर अपनी पूंजी से ही खेतीबाड़ी करते हैं। लोगों का कुशल व्यवहार व मीठी वाणी आकर्षित करती है। ग्रामीणों ने बताया कि आज तक हमलोगों के गांव को देखने लिए प्रखंड व जिले का कोई भी प्रशासनिक अधिकारी तक नहीं पहुंचा है।


