निकाय चुनाव:मेयर बनने के लिए 16 मैदान में, 12 ने वापस लिए नाम कांग्रेस के 4 बागी पार्षद डटे; कुल 306 उम्मीदवार

निगम चुनाव के नामांकन के आखिरी दिन महापौर के 12 प्रत्याशियों ने अपने नाम वापस ले लिए हैं। अब मैदान में 16 प्रत्याशी रह गए हैं। हालांकि मुख्य मुकाबला भाजपा-कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच होगा। महापौर पद के लिए 28 महिलाओं ने नामांकन दाखिल किया था। इनमें से 10 मुस्लिम समाज की महिलाएं थीं। इनमें से 9 निर्दलीय प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए। इनकी नाम वापसी में कांग्रेस के बड़े नेताओं की भूमिका बताई जा रही है। इसी तरह सभी 70 वार्डों में पार्षद लिए नामांकन दाखिल करने वाले 417 निर्दलीय उम्मीदवारों में 111 ने अपने नाम वापस ले लिए हैं। अब 306 प्रत्याशी मैदान में रह गए हैं। हालांकि कांग्रेस बागी चार पार्षदों ने नाम वापस नहीं लिया है। शहीद हेमू कालाणी वार्ड के कांग्रेस पार्षद रहे हरदीप सिंह होरा, पं. रविशंकर शुक्ल वार्ड के निवृत्तमान पार्षद आकाश तिवारी तथा इंदिरा गांधी वार्ड से पूर्व पार्षद विमल गुप्ता निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। शहीद राजीव पांडे वार्ड से कांग्रेस पार्षद रहे समीर अख्तर आप पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं। टिकटों की खींचतान में बृजमोहन-विकास आगे, मूणत और कुलदीप की भी चली नगर निगम चुनाव के लिए दोनों ही राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस में टिकट बंटवारे को लेकर जबर्दस्त खींचतान मची रही। बड़े नेताओं के बीच अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को टिकट दिलाने में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ रही। भाजपा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल और विधायक राजेश मूणत के समर्थकों ने बाजी मारी। कांग्रेस में पूर्व विधायक विकास उपाध्याय और कुलदीप की सबसे ज्यादा चली। रायपुर शहर में चार विधानसभा क्षेत्र आते हैं। चारों विधानसभा में इस समय भाजपा के विधायक हैं। वहीं रायपुर लोकसभा के सात विधानसभा में चार राजधानी रायपुर में है और दिग्गज नेता बृजमोहन अग्रवाल रायपुर से सांसद हैं। लिहाजा पार्षदों के टिकट वितरण में उनके समर्थकों को ज्यादा महत्व मिला। कांग्रेस में पश्चिम और उत्तर के बीच जमकर खींचतान युवा नेता और रायपुर पश्चिम के विधायक विकास उपाध्याय अपने ज्यादा से ज्यादा समर्थकों को टिकट दिलाने में कामयाब रहे। लगभग 10 टिकट विकास उपाध्याय के कट्टर समर्थकों को मिले हैं। इनमें ज्यादातर उनके विधानसभा क्षेत्र से ही हैं। दक्षिण विधानसभा में कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं रहा। इसलिए यहां कांग्रेस के किसी भी बड़े नेता की विशेष दावेदारी नहीं रही। हालांकि स्थानीय नेताओं ने अपने-अपने स्तर पर समर्थकों को टिकट दिलाए हैं। विकास के बाद कांग्रेस से सबसे ज्यादा रायपुर उत्तर के पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा ने टिकट दिलाए हैं।

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