निगम ने मिलों पर कराया केस:29 राइस मिल पर 156 करोड़ रुपए बकाया, वसूली नहीं कर पा रहा है राज्य खाद्य निगम

राज्य की 29 राइस मिलाें पर 156 कराेड़ रुपए बकाया है, राज्य खाद्य निगम इसकी वसूली नहीं कर पा रहा है। वहीं, वसूली नहीं हाे पाने की वजह से कई मिल पर सर्टिफिकेट केस तो कई मिल पर एफआईआर भी किया गया है। हालांकि, कुछ मिलर ताे स्वयं भी काेर्ट का रूख कर चुके हैं। वैसे ताे इन मामलाें में निगम की और से लगातार माॅनिटरिंग की जा रही है। इसके बावजूद राज्य खाद्य निगम की ओर से सभी जिला प्रबंधकाें काे यह हिदायत दी गई है कि वे थानाें में दर्ज एफआईआर काे लेकर अनुसंधान पदाधिकारियाें से संपर्क कर इसमें तेजी लाने का अनुराेध करें। इसी तरह से सर्टिफिकेट केस के मामले में हाेने वाली हर सुनवाई में निश्चित रूप से हाजिर हाें और अपना पक्ष मजबूती के साथ रखें। जिन राइस मिलाें पर राशि बकाया है, उन्हाेंने गिरिडीह, काेडरमा, हजारीबाग, चतरा, पलामू, लातेहार, गढ़वा, खूंटी, गुमला, लाेहरदगा, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, प. सिंहभूम, गाेड्डा, साहिबगंज और जामताड़ा में काम किया था। बकाया के विवाद की वजह से राज्य खाद्य निगम द्वारा अधिकांश मिलाें को काली सूची में भी डाल दिया गया है। इनमें से कुछ मिल राज्य के बाहर भी काम करते हैं। ऐसे मिल जिन्हें झारखंड में काली सूची में डाला गया है, उसकी जानकारी संबंधित राज्याें काे भी भेजी गई है। वित्तीय वर्ष 2012-13 में है सबसे ज्यादा बकाया राशि इन सभी राइस मिलाें पर खरीफ विपणन वर्ष 2011-12 से लेकर विपणन वर्ष 2021-22 तक की राशि बकाया है। सबसे ज्यादा बकाया वित्तीय वर्ष 2012-13 में है। बकाया वसूली के लिए राज्य खाद्य निगम लगातार प्रयास कर रहा है। बताया जा रहा है कि कई ऐसी राइस मिल पर बकाया है, जाे धरातल पर नजर नहीं आ रही है। ऐसे में उनसे वसूली में भी अलग तरह की परेशानी है। वसूली काे लेकर भले ही राज्य खाद्य निगम काफी गंभीर है, लेकिन जिन मिलराें पर 13-14 साल से बकाया चल रहा है, उनसे अब वसूली की संभावना खत्म हाेती नजर आ रही है। हालांकि, पिछले तीन साल से मिलराें काे धान देने और उनसे सीएमआर लेने की जाे नई व्यवस्था की गई है। उससे अब बकाया राशि का मामला लगभग खत्म हाेता जा रहा है। इसलिए निगम का ध्यान ज्यादा से ज्यादा पुराने बकाया की वसूली काे लेकर है। 4 अप्रैल तक लक्ष्य के विरुद्ध 52 प्रतिशत धान की खरीदारी धान की खरीदारी की अंतिम तिथि 15 अप्रैल है। 4 अप्रैल तक लक्ष्य के विरुद्ध मात्र 52% धान की खरीदारी ही हाे पाई है। एेसे में राज्य सरकार और खाद्य आपूर्ति विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद राज्य के किसानों से खरीदारी का लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है। शेष बचे समय में लक्ष्य को पूरा करना अब लगभग मुश्किल नजर आ रहा है। आंकड़ाें काे देखा जाए ताे धान क्रय के मामले में 10 जिले पूरी तरह से फिसड्डी साबित हुए हैं। जहां अब तक 40% लक्ष्य भी हासिल नहीं किया जा सका है। अगर 50 फीसदी लक्ष्य को हासिल करने की बात हो तो 15 जिले ऐसे हैं जो इस लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाए हैं। सबसे बेहतर स्थिति हजारीबाग जिले की है, जहां 4 अप्रैल तक लगभग 100 प्रतिशत धान की खरीदारी हो चुकी थी। बकाया राशि की वसूली के लिए लगातार हो रही माॅनिटरिंग
बकाया वसूली के लिए लगातार माॅनिटरिंग की जा रही है। सभी जिला प्रबंधकाें काे आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। सर्टिफिकेट केस और एफआईआर के मामले में भी जिला प्रबंधकाें काे निर्देश दिए गए हैं।
– सत्येंद्र कुमार, एमडी, एसएफसी

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