निदेशक बोले- रिम्स की पुरानी बिल्डिंग जर्जर, अप्रिय घटना होने की आशंका

रिम्स की पुरानी आईपीडी बिल्डिंग में कभी भी बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है। कभी भी बिल्डिंग के किसी भी हिस्से की दीवार, छत, छज्जा, पिलर आदि टूटकर गिर सकते हैं। कुल मिलाकर पुरानी बिल्डिंग की स्थिति जर्जर हो चुकी है। ये कहना है रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार का। दरअसल, उन्होंने बीते दिनों स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह को इसे लेकर पत्राचार किया है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि भवन की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं। विगत दिनों हुई भारी बारिश से छत से पानी टपक रहा है। कई स्थानों में प्लास्टर झड़ चुके हैं। बेसमेंट में पानी भर जा रहा है। बरसात के मौसम में भवन की स्थिति और भी गंभीर हो गई है। इससे रिम्स के कर्मचारियों और अस्पताल आने वाले मरीजों व परिजनों की सुरक्षा को गंभीर खतरा है। निदेशक ने अपने पत्र में यह भी बताया है कि करीब 15 दिन पूर्व न्यूरोसर्जरी ओटी के पास सीढ़ी का निचला हिस्सा टूटकर गिर गया। जिसमें कई मरीज बाल-बाल बचे। निदेशक ने कहा कि बीते वर्ष अक्टूबर में रिम्स के पूरे अस्पताल के जीर्णोद्धार कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है, लेकिन रिम्स के री-डेवलपमेंट प्लान के कारण योजना शुरू नही हो सकी है। उन्होंने मंत्री व सचिव से इंडोर की मरम्मत कार्य जल्द शुरू कराने का आग्रह किया है। अक्टूबर 2024 में रिम्स में जीर्णोद्धार व नए निर्माण के लिए 739 करोड़ की मिली थी स्वीकृति रिम्स में सालों से मरम्मत का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, लेकिन हर बार मामला कहीं न कहीं लटक रहा है। अंतिम बार अक्टूबर 2024 में रिम्स में निर्माण और जीर्णोद्धार के लिए करीब 739 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी। इस राशि से ओपीडी ब्लॉक का निर्माण कार्य, पार्किंग, ड्रेन, वॉक-वे, रोड, बिजली-प्लंबिंग आदि के अलावा पुराने ओपीडी ब्लॉक, पुराने एकेडमिक ब्लॉक, आईपीडी कॉम्पलेक्स का जीर्णोद्धार के कार्य शामिल थे। लेकिन राशि स्वीकृति के बाद रिम्स री-डेवलपमेंट प्लान को लेकर चर्चा शुरू हो गई। इस वजह से जीर्णोद्धार का काम शुरू नहीं हो सका। फोटो: वसीम दैनिक भास्कर ने रिम्स के पुराने भवन की पड़ताल की तो हालात चौंकाने वाले मिले। कई जगह छज्जे टूटकर गिर चुके हैं, कुछ हिस्सा लटका हुआ भी है। दीवारों से प्लास्टर झड़ रहा है। वार्ड के बाहर और भीतर की दीवारें सीलन से कमजोर हो चुकी हैं। सीढ़ियों के किनारे लगे ग्रिल तक उखड़ चुके हैं। पूरी इमारत जर्जर हो चुकी है, जो कभी भी किसी हादसे को न्योता दे सकती है। यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की जान हमेशा खतरे में रहती है। इसके बावजूद मरम्मत कराए जाने की गंभीर पहल अबतक नहीं हुई है। रिम्स की स्थिति : जगह-जगह टूटकर गिर रहा छज्जा, वार्डों के झड़ रहे प्लास्टर

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