अरावली पहाड़ियों पर बसे आदिवासी बच्चों को दिन में पढ़ाई के साथ पोषित करने वाले मां बाड़ी केंद्रों में ही बच्चों के निवाला चोरी हो रहा है। जनजातीय क्षेत्रीय विकास विभाग (टीएडी) उदयपुर द्वारा स्वच्छ परियोजनों के तहत 15 जिलों में ये योजना संचालित हो रही है। 5 जिलों उदयपुर, सलूंबर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर व प्रतापगढ़ में इनकी संख्या ज्यादा है। इन जिलों के 2278 मां बाड़ी केंद्रों में 55 हजार बच्चों को घटिया व मात्रा से कम खाद्य सामग्री सहकारी उपभोक्ता भंडार के माध्यम से भेजी जा रही है। भास्कर ने 7 दिन तक 100 केंद्रों की पड़ताल की। उदयपुर के केंद्रों में सप्लाई आटा और पोहे के कट्टों में दो-दो किलो कम मात्रा थी, तो दोपहर में बच्चों को पानी वाली दाल परोसी जा रही थी। इन केंद्रों पर खाद्य सामग्री वितरण में अक्सर ही देरी होती है, ऐसे में केंद्र संचालित करने वाले शिक्षा सहायक जैसे तैसे काम चलाते हैं। इधर, फलासिया की मां बाड़ी पर कीड़े लगी सामग्री दी जाती है। भोजन सहयोगी मालादेवी व सीतादेवी बताती हैं आटे में कीड़े पड़े थे, हमने छलनी से छान कर निकाले। अकेले उदयपुर में 2 माह की सप्लाई में 2404 किलो अनाज कम जनवरी में एकसाथ दो माह की खाद्य सामग्री वितरित की गई। उदयपुर में 601 मां बाड़ी केंद्रों पर उपभोक्ता भंडार के माध्यम से सप्लाई किए आटा व पोहे में 2404 किलो कम मात्रा थी। उदयपुर में 1.47 लाख किलो गेहूं और 32,650 किलो पोहे वितरित होने थे। वहीं पांचों जिलों में वितरित की गई सामग्री की दरें जनजातीय विकास विभाग ने तय कर रखी है, फिर भी चार जिलों में बिना टेंडर किए कलेक्टर की अध्यक्षता वाली कमेटी ने मर्जी की दरों पर घटिया सामग्री वितरित की। इसकी जांच शुरू की गई है। गोटपाड़ा : शिक्षा सहयोगी ने शिकायत की तो वेतन रोका ऋषभदेव क्षेत्र की मां बाड़ी पर घटिया क्वालिटी का चावल भेजा गया। पोहे की मात्रा कम थी। शिक्षा सहयोगी अमृतलाल मीणा ने शिकायत की तो उन्हें व 5 स्टाफ को अगस्त से मानदेय नहीं दिया जा रहा। कोठीकुंडा फला… सुदूर झाड़ोल उपखंड (उदयपुर) के इस केंद्र के स्टोर में रखी खाद्य सामग्री की मात्रा की जांच स्टाफ के सहयोग से की। अन्नपूर्णा ब्रांड के कट्टे पर 26 किलो आटा अंकित था, तौला तो 2 किलो कम था। गुलाब ब्रांड के कट्टे में 30 की बजाय 28 किलो ही पोहा था। शिक्षा सहयोगी प्रभुदास कसोटा ने बताया मूंग, उड़द, तुअर व काली दाल की मात्रा काम होती है। माला फला… आमलिया में 4 माह सामान नहीं आया। स्टाफ ने घर से गेहूं-चावल लाकर बच्चों को खिलाए। शिक्षा सहयोगी सुरेखा ने बताया पोहे, दाल, आटा व चावल खराब मिले थे। तीन से चार माह तक तनख्वाह नहीं मिलती है। “मां बाड़ी केंद्रों पर पोहा, आटा व अन्य सामग्री कम बंट रही है तो जांच करवाएंगे। जो भी लिप्त हैं उन पर कार्रवाई होगी। गत माह सप्लाई सामान की कीमत व गुणवत्ता की शिकायत की जांच की जा रही है। सप्लाई चेन का सिस्टम मजबूत किया जाएगा।” -शक्तिसिंह राठौड़, आयुक्त, टीएडी, उदयपुर


