नीट-यूजी 2025 में असली परीक्षार्थियों की जगह दूसरे को बैठाने वाले रैकेट के तार झारखंड, पश्चिम बंगाल और राजस्थान से भी जुड़ गए हैं। इस मामले में गिरफ्तार रामबाबू मल्लिक पिछले 11 साल से इस गोरखधंधे में सक्रिय है। पूछताछ में उसने स्वीकार किया है कि वर्ष 2014 में जयपुर के कुछ व्यक्तियों के साथ मिलकर रांची में दो अभ्यर्थियों के लिए नीट का पेपर लीक कराया था। इसके बदले उसे तीन लाख रुपए मिले थे। इन दोनों अभ्यर्थियों को सिलीगुड़ी के किसी मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाया गया था। रामबाबू मल्लिक पहले डीएमसीएच में चपरासी था। वहां उसे 17 हजार रुपए वेतन मिलता था। वहीं उसकी पहचान कुछ प्रभावशाली लोगों से हुआ। दो साल पहले ही अनुबंध समाप्त होने पर उसे हटा दिया गया। इसके बाद उसने फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र ओर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने का काम शुरू कर दिया। पहले वह फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र और फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने का काम करता था। बाद में वह पेपर लीक कराने और असली परीक्षार्थी की जगह दूसरे को परीक्षा में बैठाने वाले गिरोह में शामिल हो गया। रामबाबू का पटना के आईजीआईएमएस अस्पताल में दीपक नाम के डॉक्टर से संपर्क हुआ था। वह असली परीक्षार्थी की जगह परीक्षा देने वाले स्कॉलर की व्यवस्था करता था और एडमिट कार्ड में फोटो का मिलान कराता था। उसने रामबाबू को परीक्षार्थी खोजने की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद डॉ. रंजीत कुमार भी इस नेटवर्क में शामिल हो गया और अभ्यर्थी उपलब्ध कराने लगा। रामबाबू के मुताबिक इसकी एवज में अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर स्कॉलर को दो से पांच लाख रुपए तक दिए जाते थे। इस काम में अरविंद, विशाल और एक वेटरनरी डॉक्टर भी शामिल था। ये सभी स्कॉलर और पेपर उपलब्ध कराते थे। 6 स्कॉलर को बैठाने की थी साजिश, दो केंद्रों पर हुई थी सेटिंग रामबाबू ने दीपक, आशीष और अन्य की मदद से समस्तीपुर के बीआरबी कॉलेज व जितवारपुर स्थित कृष्णा हाई स्कूल परीक्षा केंद्र में छह स्कॉलरों को बैठाने की योजना बनाई थी। रेजीत की ओर से आकांक्षा नामक अभ्यर्थी के बदले स्कॉलर बैठाने की पुष्टि हुई है। वॉट्सएप चैट से साबित हुआ है कि एडमिट कार्ड, आधार कार्ड, हस्ताक्षर ओर फर्जी फोटो का दीपक के मोबाइल पर आदान-प्रदान हुआ था। लेकिन इसी दौरान पुलिस ने रामबाबू को गिरफ्तार कर लिया था। उसके पास से स्कॉलर को देने के लिए रखे 50 हजार रुपए भी जब्त किए गए थे। उसके मोबाइल से भी वॉट्सएप चैट, एडमिट कार्ड, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज मिले थे।


