इंदौर की सराफा चौपाटी का मामला पिछले कुछ दिनों से गरमाया हुआ है। सराफा चौपाटी को लेकर शनिवार को नगर निगम नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने नगर निगम सहित भाजपा नेताओं पर निशाना साधा। यहां तक कि उन्होंने पैसों के लेन-देन का भी आरोप लगाया। वे बोले कि सराफा बाजार की ऐतिहासिक धरोहर को इंदौर नगर निगम ने मजाक बना दिया है। उन्होंने सुझाव भी दिया कि सराफा चौपाटी को गांधी हॉल में शिफ्ट कर देना चाहिए। पिछले दिनों सराफा चौपाटी में 69 दुकानों को ही लगाने की परमिशन दी गई। जिसके बाद अन्य चौपाटी संचालकों ने अपना विरोध जताया। वे मामले में महापौर से भी मिलने गए थे, लेकिन इस मामले में उन्हें आश्वासन ही मिला। इधर, शनिवार को नगर निगम नेता प्रतिपक्ष ने भी सराफा चौपाटी को लेकर नगर निगम को घेरा। उन्होंने कहा कि सराफा चौपाटी में केवल व्यंजन की पुरानी दुकान लगाने की अनुमति दी जाना चाहिए। अभी निगम के द्वारा जो दुकानों को अनुमति दी गई है। उससे सराफा बाजार फिर से बारुद के ढेर पर बैठा हुआ नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि सराफा बाजार में रात के समय में लगने वाली चौपाटी को वैसे तो हटाने की मांग हो रही थी। निगम ने इस परंपरागत स्वरूप में लाने के नाम पर भाई-भतीजा वाद किया है। चौकसे ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा नेताओं के रिश्तेदारों को पुरातन दुकान का संचालक बताकर उनका नाम इस सूची में जोड़ दिया। सराफा बाजार में पुरातन रूप से केवल और केवल व्यंजन की यानी कि मिठाई की दुकान लगती थी। उन दुकान में मिठाई को गर्म करने के लिए कोई गैस चूल्हा आदि नहीं लगता था। इसके साथ ही उन्होंने नेताओं पर पैसों के लेन-देन का आरोप भी लगाया। पुरातन दुकान के नाम पर पावभाजी, सैंडविच की दुकानें चौकसे ने कहा कि नगर निगम ने पहले 40 दुकानों को अनुमति देने की बात कही गई थी, फिर दुकानों की संख्या बढ़कर 69 कर दी गई। निगम बार-बार दुकानों की संख्या में हेर-फेर कर रहा है। अभी पुरातन दुकान के नाम पर नगर निगम ने पावभाजी, सैंडविच, पिज्जा-बर्गर, वन शॉर्ट ड्रिंक की दुकानों को भी अनुमति दी है। ऐसी सभी दुकानों की अनुमति निरस्त की जाना चाहिए। इन दुकानों पर लगने वाले गैस चूल्हे के कारण सराफा खतरे के ढेर पर बैठा हुआ है। नेता प्रतिपक्ष ने दिए सुझाव
उन्होंने महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को सुझाव दिया है कि पूरी सराफा चौपाटी को गांधी हॉल में शिफ्ट कर दिया जाए। रात को 9 बजे से यहां पर चौपाटी शुरू कर दी जाए, क्योंकि गांधी हॉल शहर के बीच में है। यहां काफी खुली जगह है, जिससे लोगों को यहां खाने में भी परेशानी नहीं होगी, ना ही यहां आने-जाने में दिक्कत होगी। जगह बड़ी होने से पार्किंग में भी कोई परेशानी नहीं आएगी। इससे स्वादिष्ट व्यंजनों की पहचान भी खत्म नहीं होगी और लोग चौपाटी का आनंद ले सकेंगे।


