नवरात्र के समापन के दौरान राजगढ़ जिला मुख्यालय के पास बालदिया गांव के 20 वर्षीय युवक बनवारी वर्मा की नेवज नदी में प्रतिमा विसर्जन के दौरान डूबने से मौत हो गई। परिजन शव को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां ड्यूटी डॉक्टर अशोक धाकड़ ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया और उनके साथ झूमाझटकी भी की। जानकारी के अनुसार, यह घटना नवरात्र के अंतिम दिन बुधवार को हुई। बनवारी वर्मा अपने गांव बालदिया से नेवज नदी में प्रतिमा विसर्जन के लिए गया था, तभी वह गहरे पानी में डूब गया। उसे तत्काल नदी से निकालकर राजगढ़ के जिला अस्पताल लाया गया। अस्पताल पहुंचने पर ड्यूटी डॉक्टर अशोक धाकड़ ने युवक की जांच की और उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन का आरोप था कि युवक जीवित था और डॉक्टरों ने पर्याप्त इलाज नहीं किया। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि युवक को मृत अवस्था में ही लाया गया था और ईसीजी सहित सभी आवश्यक जांचें की गई थीं, जिनमें उसकी कोई जीवन गतिविधि नहीं पाई गई। परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान उनकी ड्यूटी डॉक्टर अशोक धाकड़ के साथ कहासुनी हुई और झूमाझटकी भी की गई। परिजनों का कहना था कि उन्होंने युवक का पेट दबाया तो मुंह से पानी निकला, जिससे उन्हें लगा कि वह जीवित है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिसकर्मियों ने परिजनों को समझा-बुझाकर विवाद शांत कराया। इसके बाद युवक के शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया और उसे परिजनों को सौंप दिया गया। जिला अस्पताल के सीएस डॉ. नितिन पटेल ने बताया कि युवक को अस्पताल लाए जाने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। टीआई अखिलेश यादव ने पुष्टि की कि विसर्जन के दौरान यह हादसा हुआ था और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को शांत कराया। डॉक्टर के साथ विवाद की जानकारी मिली थी, जिसे पुलिस ने हस्तक्षेप कर रोक दिया।


