जिला एवं सत्र न्यायाधीश खैरथल तिजारा मीनाक्षी शर्मा और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रनवीर सिंह ने शुक्रवार को किशनगढ़बास उप-कारागृह का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जेल की सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों के स्वास्थ्य और उनके विधिक अधिकारों का जायजा लिया। निरीक्षण के समय जेल में कुल 161 विचाराधीन बंदी दर्ज पाए गए। चिकित्सा जांच में मिली लापरवाही निरीक्षण के दौरान चिकित्सा जांच में गंभीर लापरवाही सामने आई। जिला न्यायाधीश ने पाया कि हाल ही में जेल में आए नए बंदियों का मेडिकल परीक्षण नहीं किया गया था और उन्हें बिना स्क्रीनिंग के सीधे बैरकों में भेज दिया गया था। इस पर मीनाक्षी शर्मा ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे नियमों का उल्लंघन बताया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए और स्पष्ट किया कि डॉक्टर की स्क्रीनिंग के बिना किसी भी बंदी का प्रवेश स्वीकार्य नहीं है। जेल में चालानी गार्डों की कमी मिली जेल में चालानी गार्डों की कमी भी एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आई। भिवाड़ी और खैरथल के पुलिस अधीक्षकों के बीच क्षेत्राधिकार के तालमेल की कमी के कारण जेल को पर्याप्त गार्ड नहीं मिल पा रहे हैं। इसका सीधा असर न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ रहा है। शुक्रवार को 19 बंदियों की कोर्ट में पेशी होनी थी, लेकिन गार्ड की कमी के कारण केवल 2 बंदी ही पेश हो सके, जबकि 17 बंदियों की पेशी नहीं हो पाई। न्यायाधीश ने दोनों जिला पुलिस अधीक्षकों को इस समस्या के समाधान के लिए समन्वय स्थापित करने और सुरक्षा बल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जेल परिसर में व्यवस्थाएं मिली-जुली पाई गईं। बैरक संख्या 1 और स्टोर रूम में सफाई बेहतर थी, जबकि बैरक संख्या 2 की स्थिति सामान्य मिली। जेलर ने बताया कि बंदी खुले में स्नान करते हैं और बैरक संख्या 3 को आइसोलेशन वार्ड के रूप में उपयोग किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान सीसीटीवी कैमरा संख्या 8 बंद पाया गया और ई-प्रिजन कक्ष भी जर्जर हालत में मिला, जिसे तत्काल दुरुस्त करने की आवश्यकता बताई गई।


