मकर संक्रांति के अवसर पर पतंगबाजी का दौर जोरों पर है। पतंगबाजी के बीच चाईनीज मांझा बेजुबान पक्षियों के साथ आमजन के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। नागौर स्थित महावीर गौशाला में चाईनीज मांझे से घायल पक्षियों व अन्य जीवों के उपचार के लिए एक वार्ड बनाया गया है। यहां एक लोहे के पिंजरे में घायल पक्षियों को रखा जा रहा है। पिंजरे में कैद ये कोई सामान्य पक्षी नहीं हैं, बल्कि किसी के पैर तो किसी के पंख नहीं है। इन बेजुबानों को ये जख्म आसमान में उड़ते समय चाइनीज मांझे में उलझने से मिले हैं। नागौर शहर स्थित महावीर गौशाला में ऐसे ही पक्षी पल रहे हैं, जिनको चाईनीज मांझे ने ऐसा दर्द दिया है कि किसी के पैर कट गए हैं तो किसी के पंख नहीं। नागौर शहर सहित आसपास के गांवों में घायल हुए पक्षियों को यहां इलाज के बाद पाला जा रहा है। यहां कबूतरों के साथ तोते, मोर, मैना भी है। गौशाला में घायल पक्षियों के इलाज और पालन-पोषण की शुरुआत 1998 में समिति के संस्थापक बलदेव सिंह सांखला ने की थी। तब से मकर संक्रांति पर्व पर पतंगबाजी के दौरान मांझे से घायल होने वाले पक्षियों को लोग गली-मोहल्लों से उठाकर यहां छोड़ जाते हैं। महावीर गौशाला सेवा समिति के संयोजक बलदेव सिंह सांखला ने बताया कि गोवंश की सेवा के साथ देखा कि मांझे में उलझने व करंट लगने से घायल पक्षी दम तोड़ देते हैं। इनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं होता। 1998 में ही गौशाला में पिंजरा तैयार कर ऐसे घायल कबूतर, तोते, मोर, चिड़िया को रखना शुरू किया था। हमारे यहां आने वाले पैर, पंख कटे व अंधे घायल पक्षियों का पहले इलाज करते हैं, फिर स्वस्थ होने तक देखभाल करते हैं। जो उड़ान भरने की स्थिति में होते हैं उन्हें छोड़ देते हैं। गोविंद सिंह चारण घायल पक्षियों के वार्ड की देखभाल करते हैं। संरक्षक बलदेव सिंह ने अपील करते हुए कहा कि चाईनीज मांझे से पक्षियों के पंख और पैर कट जाते हैं, इसलिए सरकार को इस पर रोक लगानी चाहिए। चाईनीज मांझे का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए। अभिभावकों को बच्चों को चाईनीज मांझे से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करना चाहिए। पक्षियोें के पंखों और पैरों के साथ ही कई बार राहगीरों के नाक, कान व अन्य अंगों को भी नुकसान होता है। इसलिए सरकार को इस पर रोक लगानी चाहिए।


