गुमला| मूली पड़हा गुमला द्वारा रायडीह मांझाटोली धुमकुड़िया भवन में पड़हा प्रणेता भिखराम भगत की जयंती मनाई गई। सर्वप्रथम कार्तिक उरांव व भिखराम भगत के चित्र पर माल्यार्पण पुष्प अर्पण व अन्ना आदि प्रार्थना कर कार्यक्रम की शुरूआत की गई। मौके पर मूली पड़हा देवान चुंईयां कुजूर ने बताया कि 1962 में पारंपरिक पड़हा का पुनर्गठन किया गया। झारखंड सरकार ने पेसा नियमावली लागू कर दी है, पड़हा कि तमाम बाते नीति निर्णय दंड जल जमीन खनिज पर निर्णय का अधिकार पारंपरिक ग्राम को मिला है और ग्राम सभा की बैठक अध्यक्षता के लिए पड़हा बेल पड़हा राजा को अधिकार मिलना पड़हा के लिए भी गर्व की बात है। मूली कोटवार देवेंद्र लाल उरांव ने बताया कि समाज को सामाजिक धार्मिक पारंपरिक सांस्कृतिक और न्यायिक रूप से मजबूत करने के लिए कार्तिक उरांव व भिखराम भगत ने पड़हा का पुनर्गठन किया था।


