राजस्थान क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि 19 दिसम्बर 2017 के दिन जालोर जिले के चितलवाना के सेसावा गांव के पास चलती कार में आग लग गई। हादसे में सेसावा गांव के ही रहने वाले दीपाराम प्रजापत की दोनों पत्नियां मालूदेवी (28) और दरियादेवी (25) जिंदा जल गईं। दीपाराम बच गया था। मौके पर लोगों ने पुलिस को बताया था कि कार के शीशों पर काली फिल्म चढ़ी थी, इसलिए अंदर बैठी दोनों महिलाएं दिखी नहीं। लोगों को सिर्फ आग ही आग दिखी। कार में गैस की टंकी दिखी तो विस्फोट होने के डर से भी वो कार के ज्यादा करीब नहीं गए। दूर से ही पानी डालते रहे। कार के शीशे टूटे तो पता चला कि दो महिलाएं जिंदा जल गईं। अब पढ़िए आगे की कहानी …
पुलिस पूछताछ में दीपाराम ने बताया कि अचानक आग लगने के बाद कार बंद हो गई थी। वो तुरंत चेक करने के लिए कार से बाहर निकला। इसके बाद कार के दरवाजे लॉक हो गए थे। वहीं कार धूं-धूं कर जलने लग गई थी। पुलिस को इस कहानी पर विश्वास नहीं हुआ। दोनों पत्नियों को एक-साथ गहने दिलाने जाना और जाने से पहले इस बारे में सभी को बताना भी पुलिस की नजर में खटक रहा था। इधर दौली के परिजन भी दबी जुबान में हत्या का शक जता रहे थे। ऐसे में पुलिस ने एक बार फिर दीपाराम को थाने पर बुलाया। इस बार उससे सख्ती से पूछताछ की गई। पहले तो वो पुलिस को इधर-उधर की बातों में उलझाता रहा, लेकिन बाद में सबकुछ सच-सच बयां कर दिया। दीपाराम ने पुलिस को बताया कि उसी ने अपनी दोनों पत्नियों मालूदेवी और दरियादेवी को ज़िंदा जला कर मारा है। वह अपनी पहली पत्नी मालू देवी को नहीं मारना चाहता था, लेकिन उसे मज़बूरी में उसका भी मर्डर करना पड़ा था। पैसे आते ही पहली पत्नी से बनाई दूरी
दीपाराम ने बताया कि 10 साल पहले उसकी शादी मालूदेवी से हुई थी। मालू भोली-भाली लड़की थी। जिस समय दीपाराम की शादी उससे हुई थी, वह काफी गरीब था। पैसे आए तो उसके नजरिया भी बदल गया। वह पत्नी को नापसंद करने लगा। मन में दूसरी शादी का इरादा बनाया
दीपाराम ने मन में दूसरी शादी का इरादा कर लिया। उसके किसी जान-पहचान वाले ने एक ऐसी औरत के बारे में बताया, जिसकी पहले 3 शादियां हो चुकी थीं। इसके बावजूद वह मां-बाप के घर रह रही थी। उस औरत का नाम था दरिया देवी उर्फ दौली। वह बाड़मेर के सिवाना के रहने वाले पीराराम प्रजापति की बेटी थी। दौली के बारे में पता चला तो दीपाराम एक परिचित के माध्यम से उसके पिता से मिला। उसके पिता को बताया कि उसकी शादी हुई थी, लेकिन पत्नी की मोैत हो गई है। अब वह उस की बेटी दौली से नाता प्रथा के तहत विवाह करना चाहता है। इसके लिए उसने पीराराम को मोटी रकम का लालच दिया। 5 लाख रुपए देकर दूसरी लड़की ले आया
पीराराम ने 5 लाख रुपए लेकर दौली का नाता प्रथा के तहत दीपाराम से विवाह कर दिया। शादी के बाद दौली ससुराल पहुंची तो दीपाराम की पहली पत्नी मालू और उसके बेटे को देख कर उसने सिर पर आसमान उठा लिया, क्योंकि दीपाराम ने झूठ बोलकर शादी की थी कि उसकी पहली पत्नी मर चुकी है। इसके बाद तो दोनों के बीच इस बात को लेकर रोज-रोज झगड़ों का सिलसिला बन गया। दीपाराम को दौली झूठा कहती और उसकी किसी बात पर यकीन नहीं करती। दीपाराम उसे समझाता कि मालू भोली है और नौकरानी की तरह रहती है। दूसरी पत्नी के घरवालों ने पंचायत बुलाई
दौली राजी नहीं थी। उसका कहना था कि वह पति का बंटवारा नहीं चाहती। उसने यह बात अपने घर वालों से बताई तो उन्होंने पंचायत बुला ली। पंचों की खातिरदारी में दीपाराम को लाखों रुपए खर्च करने पड़े। इसके अलावा उसे दौली के नाम से 10 लाख रुपए की एफडी करानी पड़ी। पंचायत में समझौता तो हो गया, लेकिन दौली शांत नहीं हुई। वह लगभग रोज ही उससे लड़ाई-झगड़ा करती। दीपाराम पत्नी के इस व्यवहार से काफी दुखी था। 2 बच्चों, ढाई साल के कैलाश और 8 महीने की सरिता की मां बनने के बाद भी दौली के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया। इधर दीपाराम को गुजरात के पालनपुर में मकान बनाने का ठेका मिला था। दौली उसके साथ ही थी। वहां भी उनके बीच झगड़ा होता था। दौली के इस व्यवहार से तंग आ कर उसका मन काम से उचटने लगा। पहली पत्नी मालू की ओर उसका झुकाव होने लगा। ..जब दूसरी पत्नी मुसीबत लगने लगी
नवंबर, 2017 में दौली दीपाराम के साथ सेसावा आई तो अपनी सास से खूब झगड़ा किया। दीपाराम को दौली की यह हरकत इतनी बुरी लगी कि अब वह उसे पत्नी नहीं, मुसीबत लगने लगी। वह दौली से पीछा छुड़ाने के बारे में सोचने लगा। दीपाराम उसे इस तरह मारना चाहता था कि हादसा लगे। ऐसा होने पर पुलिस भी उस का कुछ नहीं कर पाती। पालनपुर में वह ऐसा करना नहीं चाहता था, इसलिए गहने बनवाने की बात कहकर वह उसे गांव ले आया। 18 दिसंबर, 2017 को वह सेसावा आ गया। चलते समय उसने बोतल में 2 लीटर पेट्रोल भरवा लिया था। बोतल में पेट्रोल देख कर दौली को संदेह हुआ तो उसने यह बात अपने मायके वालों को बता दी। घर वालों ने उसका वहम बता कर बात खारिज कर दी। दीपाराम ने अपने ससुर पीराराम को पहले ही फोन करके बता दिया था कि वह दौली के लिए गहने बनवाने गांव जा रहा है। 19 दिसंबर, 2017 की सुबह दीपाराम ने मां से कहा कि वह दौली के लिए थोड़े गहने बनवाने जा रहा है। आने तक बच्चों का ख्याल रखना। यह बात मालू ने सुनी तो वह भी भागकर आई और कार का पिछला दरवाजा खोल कर बैठते हुए बोली- मुझे भी गहने चाहिए। मैं भी आपके साथ चलूंगी। दीपाराम उसे उतार भी नहीं सकता था। इसलिए उसने कार आगे बढ़ा दी। दौली, दीपाराम की बगल वाली सीट पर आगे बैठी थी। वह इस सोच में डूब गया कि प्लान को कैसे अंजाम दे? थोड़ा आगे चलने के बाद जिस तरफ दौली बैठ गई थी, उसी ओर गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर सड़क किनारे पड़े पत्थरों से कार भिड़ा दी। संयोग से दौली को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन उसके मन में शंका तो थी। ऐसे में वह कार से उतरकर भागी। वह समझ गई कि दीपाराम उसे मारने के लिए लाया है। वह थोड़ी दूर गई थी कि रास्ते में खड़ी औरतों ने पूछा, ‘क्या हुआ, तुम इस तरह भाग क्यों रही हो।’ इस पर दौली ने उन्हें बताया कि ‘मेरा पति मुझे मारना चाहता है। इसीलिए उसने कार पत्थरों से टकरा दी है।’ भाग रही पत्नी को पकड़ा
दीपाराम ने भाग रही दौली को पकड़ा और उन औरतों से बोला- ‘गलती से कार टकरा गई थी। लगता है हमारा समय ठीक नहीं है।’ इसके बाद उसने दौली से कहा- ‘चलो, घर चलते हैं।’ दौली दीपाराम के साथ जाने को तैयार नहीं थी। वहां मौजूद औरतों ने कहा- ‘तुम 2 औरतें हो। पति अकेला। वह कुछ नहीं कर पाएगा।’ इस के बाद दौली और मालू पीछे वाली सीट पर बैठ गईं। दीपाराम किसी भी कीमत पर दौली को मारना चाहता था। इसके लिए वह मालू की जान लेने को भी तैयार था। उसने सोचा कि उसके पास रुपए हैं तो वह तीसरी शादी भी कर लेगा। गांव से एक किमी पहले वारदात को अंजाम दिया
गांव से एक किलोमीटर पहले दीपाराम ने कार रोक दी। वह तेजी से नीचे उतरा और कार को लॉक कर दिया, ताकि मालू और दौली उतर न सकें। इसके बाद उसने बोतल में भरा पेट्रोल कार पर डालकर आग लगा दी। देखते ही देखते कार जलने लगी। कार के दरवाजे लॉक थे, इसलिए दौली और माली बाहर नहीं आ सकीं। उनकी चीखें तक बाहर नहीं आ सकीं। दोनों उसी में घुट-घुट कर मर गईं। बाइक वाले को देख चीखने-चिल्लाने लगा
थोड़ी देर बाद उधर से एक मोटरसाइकिल सवार निकला तो उसे देख कर दीपाराम चीखने-चिल्लाने लगा। उसने गांव में खबर की तो गांव वाले वहां पहुंचे। तब तक कार जल चुकी थी। गांव वालों ने किसी तरह पानी डाल कर आग बुझाई तो पता चला कि कार में दो महिलाएं भी सवार थीं। दीपाराम ने गांव वालों को बताया कि गाड़ी बंद होने पर वह नीचे उतरा था। इसी दौरान कार के दरवाजे खुद लॉक हो गए और आग लग गई। आजीवन कारावास की सजा
सच सामने आने के बाद 20 दिसंबर को दौली के पिता पीराराम ने चितलवाना थाने में दीपाराम प्रजापत के खिलाफ मालूदेवी और दौली की हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। मामला भीनमाल की अपर सेशन कोर्ट में चलता रहा। आखिरकार 13 मार्च को जज मनीष वैष्णव ने दीपाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। — राजस्थान क्राइम फाइल्स का पार्ट-1 पढ़िए… कार में 2 पत्नियां जिंदा जलीं, पति बाहर रोता रहा:दोनों को गहने दिलाने लेकर गया था, हादसा या हत्या? जालोर के चितलवाना थाने के तत्कालीन एसएचओ तेजूसिंह राठौड़ को सूचना मिली कि सेसावा गांव के पास चलती कार में आग लग गई है। कार में सवार 2 महिलाएं बुरी तरह झुलस गई हैं। पढ़ें पूरी खबर…


