सतना बस स्टैंड को शहर से हटाकर बाईपास पर शिफ्ट करने के फैसले ने अब बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। बस संचालकों, ड्राइवरों और कंडक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल की वजह से परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर पन्ना जिले में देखने को मिल रहा है, जहां से सतना और रीवा की ओर जाने वाले यात्री परेशान हो रहे हैं। बस स्टैंड पर यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें पन्ना बस स्टैंड पर सुबह से ही यात्रियों की भीड़ लगी है। सतना, नागौद और रीवा रूट की बसें बंद होने के कारण सैकड़ों मुसाफिर बीच रास्ते में फंस गए हैं। जनवरी की कड़ाके की ठंड में बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे बस स्टैंड पर ही घंटों ठिठुरने को मजबूर हैं। यात्रियों का कहना है कि प्रशासन और बस ऑपरेटरों की आपसी लड़ाई में आम जनता को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। कुछ रूट चालू, सतना मार्ग पूरी तरह ठप बस स्टैंड पर मौजूद यात्रियों ने बताया कि छतरपुर, बांदा और पहाड़ीखेरा के लिए तो बसें मिल रही हैं, लेकिन सतना की ओर जाने वाला रास्ता पूरी तरह बंद है। नागौद जाने के लिए इंतजार कर रहे ओम प्रकाश शर्मा और सतना जाने वाले सुरेंद्र बोनकर ने कहा कि घंटों खड़े रहने के बाद भी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं दिख रही है, जिससे घर पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।
शिफ्टिंग के फैसले पर क्यों है विरोध? दरअसल, सतना प्रशासन ने शहर के मुख्य बस स्टैंड को बाईपास पर भेजने का निर्णय लिया है। बस ऑपरेटर इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि बस स्टैंड शहर से दूर होने पर उनके व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा और जनता को भी शहर के भीतर आने-जाने के लिए ज्यादा पैसे और समय खर्च करना पड़ेगा। फिलहाल इस गतिरोध के खत्म होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।


