परंपरा को जीवंत रखने की अनूठी पहल:नाई समाज के राव-भाट 50 पीढ़ियों का इतिहास संजोकर रख रहे, युवा पीढ़ी भी जुड़ी

झालावाड़ में नाई समाज के राव-भाट अपनी सदियों पुरानी परंपरा को आज भी जीवंत रखे हुए हैं। वंशावली का बखान करने वाले ये राव-भाट घर-घर जाकर लोगों को उनके पूर्वजों की गौरवशाली गाथाएं सुनाते हैं। सरड़ा कस्बे के चौथमल सेन और महावीर प्रसाद सेन के अनुसार, इन वंशावली पोथियों में न केवल वंश का इतिहास, बल्कि समाज की सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विरासत भी संजोई गई है। इस परंपरा को आगे बढ़ाने में युवा पीढ़ी भी अपना योगदान दे रही है। किशनगढ़ के हिमांशु, जो अपने दादाजी कैलाशचंद राव और पिता लखन राव से वंशावली वाचन की कला सीख रहे हैं, पहली बार अपनी दादी उर्मिला राव के साथ इस क्षेत्र में आए हैं। उनका मानना है कि आधुनिकता की दौड़ में खोई नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखना बेहद जरूरी है। हिमांशु ने बताया कि उनके पूर्वज पहले गरोठ में रहते थे और अब किशनगढ़ में बस गए हैं। अब जब उनके दादाजी बुजुर्ग हो चुके हैं, तो वे खुद इस महत्वपूर्ण विरासत को आगे बढ़ाने का जिम्मा संभाल रहे हैं। यह परंपरा न केवल इतिहास का संरक्षण कर रही है, बल्कि पीढ़ियों के बीच सांस्कृतिक सेतु का काम भी कर रही है। वंश की संपूर्ण जानकारी मिलती हैं पोथी में
चौथमल सेन और महावीर प्रसाद सेन ने बताया कि समाज की वंशावली का बखान करने आएं हिमांशु राव के पूर्वजों ने वंश की 50 पीढ़ियों से भी ज्यादा का लेखा-जोखा अपनी वंशावली पोथी में रख रखा है। वंशावली पोथी में वंश की कुलदेवी, भैंरूजी सहित कई विधि, मान्यताओं की जानकारी मिलती है। वंशावली लेखक जब भी घर आते हैं, तब परिवार में नए जन्म लेने वाले लड़कों, लड़‌कियों के नाम, शादी विवाह संबंधित संपूर्ण जानकारी को अपनी पोथी में अंकित करते हैं। साथ ही वंशावली लेखक को जो दान दक्षिणा दी जाती है और जो भोजन वह ग्रहण करते हैं, वह भी अपनी वंशावली पोथी में लिखते हैं। नई पीढ़ी को इतिहास व वंश की जानकारी देना उद्देश्य- उर्मिला राव अजमेर जिले के किशनगढ़ निवासी वंशावली लेखक हिमांशु राव की दादी ने बताया कि 750 से अधिक गांवों के 9 लाख 80 हजार परिवारों की वंशावली का लेखा जोखा अपनी पोथी में अंकित कर रखा हैं। वह स्वयं पिछले 40 वर्षों से प्रति 5 से 7 साल में यहां आ रही हैं। उर्मिला राव ने चौथमल सेन व महावीर प्रसाद सेन के पिताजी बालचंद सेन के परदादा द्वारा उनके पूर्वजों को दी गई लाल घोड़ी और सोने की मोहर का जिक्र किया। तत्कालीन समय की आर्थिक स्थिति से परिवार को अवगत करवाया। उर्मिला राव ने बताया की नई पीढ़ी को अपने वंश और इतिहास की जानकारी देने के उद्देश्य से परिवार द्वारा वंशावली का लेखन किया जा रहा है।

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