परिवार ने हिंदू धर्म में वापसी की तब शव दफन करने जमीन मिली

भास्कर न्यूज | नारायणपुर जिले के ग्राम बोरपाल में धर्मांतरित परिवार के सदस्य की मौत के बाद शव दफनाने को लेकर हुआ विवाद शांत हो गया। मृत व्यक्ति के शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। बताते हैं कि बोरपाल गांव में 4 दिनों से तनाव की हालत थी। आदिवासी समाज ने धर्मांतरित परिवारों की घर वापसी करवाई, जिसके बाद शव दफनाने की अनुमति दी। बताते हैं कि बोरपाल निवासी बीरसिंह कुमेटी के पिता की मौत 11 जनवरी को हो गई थी। परिवार धर्मांतरित हो चुका था, ऐसे में आदिवासियों ने शव को गांव में दफनाने का विरोध किया, लेकिन परिजनों ने ईसाई रीति-रिवाज से उसका अंतिम संस्कार कर दिया, जिसके बाद गांव में विवाद की हालत हो गई। मामले में बाद में प्रशासन ने दखल देकर दोनों पक्षों को समझाइश दी और माहौल शांत करवाया। आदिवासियों ने रैली व धरना प्रदर्शन भी किया था। समाज की बैठक हुई, जिसमें धर्मांतरित परिवार को समाज के रीति-रिवाजों के अनुसार ही अंतिम संस्कार की मंजूरी देने पर चर्चा हुई। इसके लिए परिवार को पहले समाज में शामिल किया गया । दोनों पक्षों में सहमति के बाद गायता पटेल ने माटी पूजा करवाई। तिलक लगाकर घर वापसी करवाई। समाज के गुलाब बघेल, मंगऊराम सहित अन्य ने बताया कि बीरसिंह का परिवार पहले आदिवासी था, जिसने धर्मांतरण कर लिया था। 10 जनवरी को बीरसिंह की मौत के बाद अंतिम संस्कार को लेकर विवाद हुआ था, जिसे सुलझा लिया गया है।

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