चित्तौड़गढ़ | राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े ने सोमवार को दुर्ग का अवलोकन कर गाइड व अधिकारियों से यहां के इतिहास को लेकर अपनी जिज्ञासा शांत की। इसी दौरान अपने गृह प्रदेश महाराष्ट्र के एक पर्यटक समूह से बात की और उनके दो छोटे बच्चों के साथ विजयस्तंभ की स्मृति तस्वीर में संजोई। विजयस्तंभ से निकलते समय महाराष्ट्र के एक पर्यटक समूह ने बागड़े को करीब से देखकर मराठी भाषा में जय महाराष्ट्रा, जय श्रीराम का उदघोष किया। सुनते ही राज्यपाल रुक गए और पर्यटकों से उनके निवास स्थान के बारे में जाना। जो नांदेड से आए थे। इनके दो छोटे बच्चों को साथ लेकर पूरे विजयस्तंभ के साथ अपनी फोटो खिंचवाई। परिजनों को कहा कि जब ये बड़े हो जाए तो भी इनको वापस यहां लाकर दिखाना। सभी को अपने बच्चों व युवाओं को ज्यादा से ज्यादा ऐसी विरासत दिखानी चाहिए। व्यू पाइंट से भ्रमण की शुरुआत करते हुए बागड़े ने शहर के विहंगम नजारे के साथ सीमेंट फैक्ट्रियों को देखकर कलेक्टर आलोक रंजन से इस बारे में जानकारी ली। कुंभा महल में महाराणा सांगा का नाम लेते हुए उनका इतिहास जाना। गाइड से पन्नाधाय और मीराबाई के इतिहास का उल्लेख आने पर इनके महल तक गए। पूछा कि क्या ये इमारतें पहले भी ऐसी थी? और खंडहर होने पर क्या होता है। कलेक्टर ने एएसआई द्वारा समय समय पर संरक्षण कार्य की जानकारी दी। राज्यपाल ने मीरा मंदिर व कुंभ श्याम मंदिर को अंदर से जाकर देखा। विजयस्तंभ की स्थापत्य शैली से अभिभूत होकर कहा कि तब कैसे शिल्पकार रहे होंगे और कितनों को रोजगार मिला होगा। दुर्ग के फैलाव व प्राचीन जल संरचना से भी प्रभावित हुए। कलेक्टर आलोक रंजन, एसपी सुधीर जोशी, एएसपी सरितासिंह, सीईओ विनय पाठक, एसडीएम बीनू देवल, डीएसपी विनय चौधरी, सीआई संजय स्वामी, सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद गोविंदसिंह मीणा, सहायक अधीक्षण उद्यानविद सुरेश मीणा, संरक्षण प्रभारी प्रेमचंद शर्मा, सर्वेयर देवव्रत दुबे आदि मौजूद रहे। भासकर संवाददाता | चित्तौड़गढ़ राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने सोमवार को कलेक्ट्रेट के डीआरडीए हॉल में जिलास्तरीय अधिकारियों से संवाद कर कई योजनाओं के क्रियान्वयन व प्रगति की जानकारी ली। करीब डेढ़ घंटे की बैठक में राज्यपाल का वंचित वर्ग सहित कुछ मामलों पर फोकस नजर आया। स्वयं सहायता समूह व एनजीओ के जरिये जरूरतमंदों को आर्थिक संबल तथा रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों की जानकारी लेते हुए कहा कि किसी वस्तु का उत्पादन के साथ मार्केटिंग भी उतनी ही जरूरी है। इनके द्वारा तैयार उत्पादों की पर्याप्त मार्केटिंग कराने पर भी अधिकारी पूरा प्रयास करें। उन्होंने मेडिकल कॉलेज तथा स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले चिकित्सकों के स्थानीय स्तर पर सेवाएं देने के प्रयास करने को कहा। कलेक्टर आलोक रंजन ने योजनाओं की जानकारी पीपीटी के माध्यम से दी। जिले में किए नवाचार बताए। कलेक्टर ने राजीविका द्वारा तैयार बैग और डीएफओ सोनल गोरिहार ने पौधा देकर राज्यपाल का स्वागत किया। राज्यपाल ने एक पेड़ मां के नाम अभियान में लगाए पौधों एवं उनकी सुरक्षा की जानकारी ली। एसपी सुधीर जोशी, एडीएम प्रभा गौतम व रामचंद्र खटीक, डीएफओ विजयशंकर पांडे, सीईईओ विनय पाठक, एसीईओ राकेश पुरोहित सहित जिलास्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। स्वीकृत आवासों का धनतेरस पर शिलान्यास का नवाचार अच्छा लगा राज्यपाल ने प्रधानमंत्री आवास योजना की विस्तृत जानकारी ली। जिला प्रशासन द्वारा स्वीकृत आवासों का धनतेरस पर एक साथ शिलान्यास करने के नवाचार को सराहा। लखपति दीदी बनाने के प्रयास जाने। केंद्र प्रायोजित विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी ली। सड़कें रही व्यवस्थित, साफ सफाई पर फोकस: एक साथ दो राज्यपालों के एक ही समय एक ही दिन शहर से होकर दुर्ग पर आने जाने को देखते हुए पूरे रूट मार्ग पर विशेष सफाई के प्रबंध रखे गए। किला रोड, सुभाष चौक, गंभीरी नदी पुलिया सहित किले और मार्ग पर अतिक्रमण हटा दिया गया। सभी वाहनों को एक लाइन में खड़ा रखा गया। डंप साइट से कचरे को हटाकर सफेद लाइनिंग की गई। करीब तीन दर्जन जगहों पर पडे हुए गडडो को सीमेंट से भर दिया गया। किले पर स्मारकों पर विशेष सफाई की गई। पेयजल के प्रबंध रखे गए। कलेक्ट्रेट को भी एक तरह से राजभवन की तरह सजाया गया। कलेक्ट्रेट परिसर में टेंट, शामियाने लगाए गए। कलेक्ट्रेट में पहली बार राज्यपाल के आगमन व बैठक भी लेने को लेकर समूचा प्रशासन अलर्ट रहा। भवन के बाहर खुले परिसर में मुख्य फाटक से लेकर पहली मंजिल पर डीआरडीए हॉल तक रास्ते में लाल कालीन बिछाई गई। सभागार फूलों व पेंटिंग आदि से ऐसे सजाया गया मानों उद्यान हो। मुख्य पोर्च गेट पर भी रैंप बनाकर रैलिंग लगाई। हालांकि राज्यपाल पहली मंजिल पर सीढ़ियों से ही पहुंचे। बैठक के बाद उनको कलेक्ट्रेट में ही जिले से विदाई का गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।


