कांग्रेस मीडिया एंड कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट के प्रमुख पवन खेड़ा ने इंदौर में दूषित पेयजल से हुई 18 मौतों को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खेड़ा ने कहा कि मध्य प्रदेश वह राज्य है, जहां लंबे समय से भाजपा का शासन है और उसी दौर में इंदौर को स्वच्छ भारत अभियान में लगभग आठ बार पहला स्थान मिला। आज उसी “नंबर-वन शहर” में लोग गंदा पानी पीकर मर रहे हैं। यह सरकार के नारों और दावों की पूरी पोल खोल देता है। हर घर जल की जगह हर घर मल पहुंचाया जा रहा था पवन खेड़ा ने कहा कि “क्लीन सिटी इंदौर”, “स्मार्ट सिटी इंदौर” और “हर घर जल योजना” तीनों के दावों का सच इंदौर में सामने आ गया है। हर घर पाइप्ड वॉटर योजना के तहत पाइपलाइन बदलने के ठेके का अप्रूवल जुलाई 2022 में मिल चुका था। सिर्फ कंपनी फाइनल होनी थी, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अधिकारी और सरकार कमीशन तय होने का इंतजार कर रहे थे, इसलिए लोगों की जान दांव पर लगा दी गई? दवा, हवा और पानी में मिलावट
खेड़ा ने कहा कि यह सिर्फ इंदौर की कहानी नहीं है। गुजरात के गांधीनगर जहां से अमित शाह आते हैं, वहां टाइफाइड फैल रहा है, लेकिन इस पर टीवी डिबेट नहीं होती। दिल्ली की मिसाल देते हुए उन्होंने कहा कि पहले पानी पीला था, अब काला हो गया है। पूरे देश में हवा में जहर, पानी में जहर, दवाइयों, कफ सिरप और खाने-पीने की चीजों में मिलावट है। अगर कुछ कसर बची है, तो वह भाजपा नेताओं की जुबान में जहर से पूरी हो जाती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “यही है भाजपा का अमृत काल।” मंत्री विजयवर्गीय सवाल पूछने पर बदसलूकी करते हैं
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अगर पत्रकार सवाल पूछते हैं तो कैलाश विजयवर्गीय बदतमीजी और गाली-गलौज पर उतर आते हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री मोहन यादव मस्ती में गाने गा रहे हैं। मेयर कुछ कहता है, मंत्री कुछ और, मुख्यमंत्री अलग ही दुनिया में हैं। इस आपसी अराजकता और सत्ता के नशे का खामियाजा आम जनता और छोटे-छोटे बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। जनता को हिन्दू-मुसलमान के विवाद में उलझाया जाता है
पवन खेड़ा ने इंटरनेशनल सेंटर फॉर सस्टेनेबिलिटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत का करीब 70 प्रतिशत पानी दूषित हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता को जानबूझकर हिंदू-मुस्लिम और दूसरे विवादों में उलझाया जाता है, ताकि असली मुद्दे जहरीला पानी, दवाओं में मिलावट और स्वास्थ्य संकट हाशिए पर चले जाएं। उन्होंने कहा कि हजारों करोड़ रुपए “हर घर जल योजना” पर खर्च किए गए, लेकिन हकीकत में यह योजना “घर-घर जल” नहीं, बल्कि “घर-घर मल” बन गई। लोगों के नलों से मल-मिला पानी आ रहा था, और इंदौर में इसका भयावह सच सामने आ गया। मेयर से लेकर पीएम तक जिम्मेदार
खेड़ा ने सीधे तौर पर जिम्मेदारी तय करते हुए कहा कि यह केवल स्थानीय प्रशासन की नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री, मेयर और मंत्रियों तक की जवाबदेही है। उन्होंने सवाल किया कि जब प्रधानमंत्री कहते हैं कि “70 साल में कुछ नहीं हुआ, मैं घर-घर पानी पहुंचा रहा हूं”, तो फिर लोग मर क्यों रहे हैं? एशियन डेवलपमेंट बैंक से इस काम के लिए पैसा आया। उसका ऑडिट कौन करेगा और वह पैसा कहां गया? उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में एडीबी से 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर का लोन भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों के लिए मिला था। सवाल है कि उस रकम का क्या हुआ? ठेके निकालकर काम रोक दिया गया और इंतजार किया गया कि कमीशन कौन देगा। क्या यही वजह है कि योजनाएं कागजों में चलती रहीं और जमीन पर लोग मरते रहे? हैजा का बैक्टीरिया मिला तो नोटिफिकेशन हुआ या नहीं
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने सरकार से सीधे सवाल पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में वॉटर सैंपल और प्रभावित नागरिकों के स्टूल सैंपल की कल्चर जांच हुई या नहीं। अगर जांच हुई, तो क्या उसमें हैजा (वाइब्रो कॉलेरा) का बैक्टीरिया मिला? यदि इसकी पुष्टि हुई, तो क्या इसे आईडीएसपी के तहत नोटिफाई किया गया, क्योंकि भारत में हैजा एक नोटिफाएबल बीमारी है। क्या हैजा से जुड़ी मौतों और मामलों की जानकारी केंद्र सरकार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और WHO को दी गई? खेड़ा ने कहा कि सरकार क्या छिपा रही है, यह सिर्फ मध्य प्रदेश नहीं, बल्कि पूरे देश की जनता जानना चाहती है। 18 मौतें किसी हादसे का नतीजा नहीं हैं, बल्कि यह शासन की विफलता, भ्रष्टाचार और जवाबदेही से भागने की राजनीति का परिणाम हैं। सवाल यह है कि क्या कोई जिम्मेदारी लेगा या फिर यह मामला भी बाकी घोटालों की तरह फाइलों में दफन कर दिया जाएगा? खेड़ा ने इन सवालों पर भी सरकार को घेरा


