भास्कर न्यूज | जालंधर श्री आनंद साहिब बाणी के रचयिता और पहले पंगत पीछे संगत की परंपरा की शुरुआत करने वाले धन्य-धन्य श्री गुरु अमरदास जी महाराज का ज्योति जोत पर्व गुरुद्वारा छठी पातशाही बस्ती शेख में रविवार को मनाया गया। अमृत वेले दीवान सजाए गए जिसमें ज्ञानी बलवंत सिंह जी द्वारा लड़ीवार आसा की वार बाणी की कथा विचार की गई। हरबंस सिंह के परिवार की ओर से अपने माता-पिता जी की याद में सहज पाठों के भोग डाले गए और पूर्व इंस्पेक्टर अमरजीत सिंह की ओर से सुखमनी साहिब जी की बाणी के पाठ करवाए गए। इन्हें प्रबंधक कमेटी ने सिरोपा देकर सम्मानित किया।पहले दीवान की समाप्ति के उपरांत मासिक पूर्णिमा दिवस के दीवान सजाए गए। ज्ञानी रणजीत सिंह के ढाडी जत्थे ने ढाडी वारों के माध्यम से संगत को निहाल किया। इसके उपरांत बीबी बलजिंदर कौर खडूर साहिब वालों के जत्थे ने कीर्तन द्वारा गुरु की स्तुति गाई। प्रधान गुरकृपाल सिंह ने गुरु अमरदास जी के जीवन से संबंधित विभिन्न घटनाओं का वर्णन किया और गुरु साहिब द्वारा समाज की भलाई के लिए किए गए परोपकारी कार्यों की जानकारी संगत को देते हुए संगतों और आए हुए जत्थों का धन्यवाद किया। दीवान की समाप्ति पर लंगर बांटा गया।


