पार्षद और सरपंच चुनाव के लिए 10वीं पास होना जरूरी:अनपढ़ों को निकाय-पंचायतीराज इलेक्शन में प्रतिबंध करने की तैयारी; सीएम को भेजा प्रस्ताव

प्रदेश में अगले साल होने वाले पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों में सरकार ने शैक्षणिक योग्यता लागू करने की तैयारी कर ली है। अनपढ़ों को पार्षद, सरपंच, मेयर, सभापति, नगरपालिका अध्यक्ष, प्रमुख, प्रधान, जिला परिषद मेंबर, पंचायत समिति मेंबर चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने की तैयारी है। यूडीएच मंत्री ने शहरी निकाय चुनाव और पंचायतीराज मंत्री ने पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों में शैक्षणिक योग्यता लागू करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास मंजूरी के लिए भेजा हैं। मुख्यमंत्री स्तर पर फैसला होते ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मुख्यमंत्री को भेजे गए प्रस्तावों में सरपंच के लिए कम से कम 10वीं पास होने की अनिवार्यता लागू करने का प्रस्ताव दिया है। पार्षदों के लिए 10वीं और 12वीं में से एक योग्यता लागू करने का प्रस्ताव है। इन सब पर फाइनल फैसला मुख्यमंत्री को करना है। अगले साल होने वाले निकाय और पंचायतीराज चुनावों में शैक्षणिक योग्यता लागू हुई तो अनपढ़ नेता चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। खर्रा बोले-निकाय चुनाव में शैक्षणिक योग्यता लागू करने का हमने प्रस्ताव भेज दिया यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि शहरी निकाय चुनावों में शैक्षणिक योग्यता लागू करने का प्रस्ताव हमने मुख्यमंत्री के पास भेज दिया है। पार्षद के लिए 10वीं या 12 वीं में से एक योग्यता तय करने का प्रस्ताव दिया है। हमारे पास कई संगठनों और राजनीतिक प्रतिनिधियों से यह मांग आई थी कि शहरी निकाय और पंचायत चुनावों में शैक्षणिक योग्यता लागू हो। अब मुख्यमंत्री स्तर पर फैसला होना है। हमने तो प्रस्ताव भेज दिया है। पंचायतीराज और निकाय चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता लागू करने के लिए पंचायतीराज एक्ट और नगरपालिका कानून में संशोधन करने होंगे। मुख्यमंत्री स्तर से मंजूरी मिलने के बाद दो अलग-अलग बिल लाए जाएंगे। विधानसभा के बजट सत्र में दोनों बिलों को पारित कर कानून में संशोधन करवाया जा सकता है। 2015 में वसुंधरा राजे सरकार ने लागू की थी निकाय-पंचायतीराज चुनावों में शैक्षणिक योग्यता
2015 में तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार के समय पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों में शैक्षणिक योग्यता लागू की थी। 2015 में चुनाव से ठीक पहले फैसला किया था। उस वक्त कैबिनेट से भी सर्कुलेशन से मंजूरी ली थी ताकि मामला गोपनीय रहे। सरपंच के लिए आठवीं, पार्षद के लिए 10वीं पास की योग्यता थी
वसुंधरा राजे सरकार के वक्त किए फैसले में वार्ड पंच अनपढ़ हो सकता था लेकिन सरपंच का आठवीं पास होना जरूरी था। आदिवासी इलाके (टीएसपी एरिया) में सरपंच के लिए पांचवीं पास होना अनिवार्य किया था। पंचायत समिति मेंबर और जिला परिषद मेंबर के लिए 10वीं पास की योग्यता लागू की गई थी। पार्षद और निकाय प्रमुखों के लिए 10वीं पास की योग्यता की थी। गहलोत सरकार ने 2019 में बदल दिया था प्रावधान
निकाय और पंचायतीराज चुनावों में शैक्षणिक योग्यता लागू करने का कांग्रेस ने भारी विरोध किया था। कांग्रेस ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया था। 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद 2019 में इस प्रावधान को हटा दिया गया। शैक्षणिक योग्यता लागू करने से बीजेपी को हुआ था फायदा
पंचायतीराज चुनावों में शैक्षणिक योग्यता का प्रावधान लागू करने का बीजेपी को गांवों में फायदा हुआ था। कांग्रेस की तुलना में बीजेपी से ज्यादा संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि जीतकर आए थे। अब फिर बीजेपी के एक धड़े ने ही फिर से इसकी पैरवी की जिसके बाद प्रस्ताव तैयार कर सीएम को भेजा गया है।

ये खबर भी पढ़िए-
निकाय और पंचायतीराज चुनाव में ऊंटगाड़ी-बैलगाड़ी से प्रचार पर रोक:खर्च सीमा दोगुना तक बढ़ाई, जानें- किसके लिए कितनी राशि तय की पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव में खर्च सीमा को दोगुना तक बढ़ा दिया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने खर्च सीमा बढ़ाने की अलग-अलग अधिसूचना जारी की है। (पढ़िए पूरी खबर)

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *