पाली में डीएपी खाद के लिए किसानों की लम्बी कतार:खाद के लिए बच्चों को तो किसी ने पत्नी-मां को लगाया लाइन में

खेतों में किसान फसल की बुवाई करने को लेकर तैयार है, लेकिन पर्याप्त खाद नहीं होने से उनकी परेशानी बढ़ गई है। ऐसे में जब उन्हें पता चला कि पाली क्रय-विक्रय सहकारी समिति में खाद की गाड़ी आई है तो अलसुबह से किसान समिति के बाहर खाद लेने के लिए कतार में खड़े हो गए। हर किसी को शिकायत थी कि जितनी जरूरत है उससे काफी कम खाद के कट्‌टे मिल रहे है। दोपहर तीन बजे तक यहां लोग धूप में लाइन लगाकर खड़े नजर आए। क्रय विक्रय सहकारी समिति के कनिष्ठ लिपिक जीवाराम ने बताया कि 520 कट्‌टों की सप्लाई मिली है। 3 कट्‌टे एक आधार कार्ड पर दे रहे है। अधिकतर को शिकायत थी कि खाद कम मिली रही है। वहीं कई किसान इस बात से परेशान थे कि लंबी लाइन में खड़े रहने के बाद भी उनका नंबर अभी तक नहीं आया। व्यवस्था बनाए रखने के लिए यहां पुलिस भी तैनात की गई। यहां एक आधार कार्ड पर एक किसान को 50 KG खाद के 3 कट्‌टे 1350 रुपए प्रति कट्टों के हिसाब से दिए जा रहे थे। जिससे 10 बीघा में उपयोग किया जा सकता है। खाद के लिए बेटा-बेटी और पत्नी को लगाया लाइन में
पाली के निकट स्थित बागडिय़ा गांव के हेमराज अपनी पत्नी और बेटा-बेटी को लेकर यहां खाद लेने के लिए लाइन में खड़ा नजर आया। बोला कि 40 बीघा जमीन है। 12 से 15 कट्‌टों की जरूरत होती है। एक आधार कार्ड पर 3 कट्‌टे ही दिए जा रहे है। ऐसे में बच्चों को भी स्कूल से छुट्टी दिलाकर यहां लाइन में लगा रखा है ताकि पर्याप्त खाद मिल सके। 60 कट्टे चाहिए मिल रहे 3 कैसे करू खेती
मंडिया गांव के रहने वाले मनाराम घांची बताते है कि 120 बीघा जमीन है। बुवाई के लिए कम से कम 60 कट्‌टों की जरूरत है। लेकिन एक आधार कार्ड पर तीन कट्‌टे ही मिल रहे है। ऐसे में बुवाई कैसे करे। बुवाई का समय भी सिर पर आ गया है। नैनो डीएपी की बोतल जबरदस्ती दे रहे
रूपावास गांव के किसान मोहनलाल कहते है कि गुजरात में नैनो डीएसपी की बोतल किसानों को नहीं दी जा रही है। लेकिन पाली में जबरदस्ती किसानों को खाद के साथ यह बोतल लेनी पड़ रही है। जबकि सरकार की और ऐसा कोई आदेश नहीं है कि इसे खरीदना जरूरी है। सुबह 5 बजे से आई हूं, अभी तक नहीं आया नंबर
सांपा गांव की रहने वाली सीता देवी का आरोप है कि वह सुबह करीब पांच बजे यहां खाद लेने आई है। लेकिन अभी तक नंबर नहीं आया है। काफी परेशान है यहां पीने के पानी की व्यवस्था तक नहीं है। पानी की बोतल भी खरीदनी पड़ रही।

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