सरगुजा कलेक्टर विलास भोस्कर ने आदिवासी भूमि के रजिस्ट्री पावर ऑफ अटार्नी से करने पर रोक लगा दी है। कलेक्टर ने पावर ऑफ अटार्नी से जमीन रजिस्ट्री की जांच के निर्देश दिए हैं। सरगुजा अधिसूचित क्षेत्र है। यहां पहले पावर ऑफ अटॉर्नी के दुरुपयोग की कई शिकायतें कलेक्टर तक पहुंची हैं। कलेक्टर विलास भोस्कर ने बताया कि, हाल ही में जिला प्रशासन के संज्ञान में आया है कि आदिवासियों की भूमि पर खरीद-बिक्री, रजिस्ट्री, नामांतरण, बंटवारा, लीज आदि के मामलों में मूल आदिवासी के नाम पर भूमि की पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार करवा ली जाती है। इसके आधार पर अन्य व्यक्ति भूमि का सौदा, रजिस्ट्री, नामांतरण और अन्य राजस्व कार्य करवा लेते हैं, जिससे आदिवासी भूमिहीन हो जाते हैं। भूमि स्वामी की उपस्थिति अनिवार्य कलेक्टर भोस्कर ने विशेष निर्देश जारी किया है कि, यदि किसी न्यायालय में पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर आदिवासी भूमि के हस्तांतरण का प्रकरण आता है, तो उस मामले में मूल भू-स्वामी को न्यायालय में उपस्थित कर पावर ऑफ अटॉर्नी देने के कारणों की जांच की जाएगी। वृद्ध या असमर्थ व्यक्तियों के मामले यदि आदिवासी भू-स्वामी वृद्ध, बीमार या अन्य कारणों से न्यायालय में उपस्थित नहीं हो सकता, तो तहसीलदार एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत मिलकर उस ग्रामीण के घर जाकर उसका बयान दर्ज करेंगे। इस कार्रवाई का वीडियो और फोटो भी न्यायालय में पेश किया जाएगा। जिससे मामले में निराकरण किया जा सके। एसडीएम और तहसील न्यायालयों में ऑनलाइन सुनवाई कलेक्टर ने कहा कि, जिले के समस्त एसडीएम और तहसील न्यायालयों को ऑनलाइन किया जाएगा। आदिवासी मामलों के प्रकरणों में की गई कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखा जाएगा। कलेक्टर ने आदेश जारी कर अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा है। जिससे अनुसूचित जनजाति के हित को संरक्षण किया जा सके।


