झारखंड अकादमिक काउंसिल (जैक) द्वारा मैट्रिक और इंटरमीडिएट कला, विज्ञान और वाणिज्य स्ट्रीम में तीन फरवरी से दो सिटिंग में आयोजित होने जा रही है। फर्स्ट सिटिंग में मैट्रिक और सेकेंड सिटिंग में इंटरमीडिएट की परीक्षा होगी। बाहर से देखने पर यह एक सामान्य वार्षिक परीक्षा की प्रक्रिया लगती है। लेकिन जब इसे 2025 के आंकड़ों की तुलना में देखा जाता है, तो साफ होता है कि इस बार परीक्षा का पैमाना नहीं, बल्कि उसकी संरचना बदली गई है। वर्ष 2025 में रांची जिले के 159 परीक्षा केंद्रों पर 73,622 छात्रों ने परीक्षा दी थी। वहीं 2026 में 122 केंद्रों पर 73,814 छात्र परीक्षा देंगे। यानी छात्रों की संख्या लगभग (192 बढ़े) स्थिर है। जबकि पिछले साल की अपेक्षा 37 केंद्र कम कर दिए गए हैं। इसका मतलब है कि हर केंद्र पर औसतन अधिक छात्रों का बोझ पड़ेगा। परीक्षा संचालन पहले से ज्यादा सघन और संवेदनशील होना स्वाभाविक है। परीक्षार्थियों की मामूली बढ़त के बाद भी केंद्र संख्या में भारी कटौती परीक्षा संचालन की रणनीति और संसाधन नियोजन दोनों को प्रभावित करेगी। जैक ने सभी जिलों से कहा था कि प्रखंड स्तर पर मैट्रिक और इंटर की परीक्षा के लिए केंद्रों का निर्धारण नहीं करें। ऐसा ही किया गया है। भास्कर एक्सपर्ट रवींद्र प्रसाद सिंह, हाईस्कूल के रिटायर्ड शिक्षक जैक ने रेगुलेशन के विपरीत प्रखंड स्तर पर परीक्षा केंद्र नहीं बनाए, इसलिए घट गए केंद्र परीक्षा केंद्रों की संख्या घटने का कारण कोई तकनीकी या प्रशासनिक बाध्यता नहीं, बल्कि 1987 में बने कानून और उसके आधार पर तैयार परीक्षा रेगुलेशन की अनदेखी है। एकीकृत बिहार में परीक्षा संचालन को लेकर बनाए गए अधिनियम के आधार पर झारखंड बनने के बाद जैक ने परीक्षा रेगुलेशन बनाया। इसमें साफ लिखा है कि परीक्षा केंद्र का निर्धारण जिला स्तर की केंद्र निर्धारण समिति करेगी। लेकिन जैक ने इसके विपरीत जाकर प्रखंड स्तर पर केंद्र निर्धारित नहीं करने को कहा है, इसलिए केंद्रों की संख्या कम हो गई है। साइंस-कॉमर्स के प्रति रुचि घटी रांची जिले में इंटरमीडिएट साइंस और कॉमर्स के प्रति छात्रों की रुचि कम हुई है। आंकड़े तो यही बता रहे हैं। वहीं इंटरमीडिएट कला में 19723 विद्यार्थियों के साथ सबसे आगे है। विज्ञान और कॉमर्स शिक्षा की पहुंच अभी लक्ष्य से दूर है।


