पीडीएस का चावल ‌‌‌‌‌~20 में खरीद कर 30 रुपए प्रति किलो बेच रहे दुकानदार

भास्कर एक्सक्लू​िसव सरकार की ओर से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सस्ते दर या मुफ्त में दिए जाने वाले जन वितरण प्रणाली दुकान का चावल जिले में खुलेआम कालाबाजारी की जा रही है। पीडीएस दुकानदारों, बिचौलियों और बाजार के व्यापारियों की मिलीभगत से गरीबों का हक बाजार तक पहुंच रहा है। हालात ऐसे हैं कि वही सरकारी चावल, जो गरीबों के लिए है, पहले सस्ते दामों पर खरीदा जाता है, फिर बोरी में दोबारा पैक कर बाजार भाव में बेचा जा रहा है। दुंदीबाद बाजार में सक्रिय दुकानदारों का कहना है कि पीडीएस दुकानों से आने वाला चावल 18 से 20 रुपए प्रति किलो में आसानी से मिल जाता है। इसके बाद उसी चावल को 25 से 30 रुपए प्रति किलो तक में बेचा जाता है। दुकानदार सुरेन्द्र प्रसाद साव ने बताया कि कोटा वाला चावल 25 से 30 रुपए प्रति किलो बिकता है। पूछने पर उन्होंने स्वीकार किया कि पीडीएस दुकान का चावल 18 से 20 रुपए में खरीद लिया जाता है। वहीं दुकानदार मिहिर कुमार महतो ने बताया कि वे 18 रुपए किलो चावल खरीदते हैं और 22 से 25 रुपए किलो के दर से बेचते हैं। बिचौलिया अनाज को भेजते हैं राइस मिल सूत्रों के मुताबिक, बिचौलिए पीडीएस दुकानदारों से मिलीभगत कर गरीबों का चावल बड़े पैमाने पर खरीदते हैं। इसके अलावा दुंदीबाद बाजार से भी दुकानदारों से 50 से 100 बोरी तक चावल एकत्र किया जाता है। इस अनाज को पिकअप वैन के जरिए दूसरे जिलों की राइस मिलों में भेजा जाता है। वहां से वही चावल दोबारा प्रोसेस होकर सरकारी पीडीएस दुकानों या खुले बाजार में बंद पैकेट के जरिए पहुंचाया जाता है। जो बाजार में 30 रुपए तक प्रति किलो की दर से बिकता है। पिकअप वाहन चालकों के अनुसार, हर दो-तीन दिन में एक गाड़ी, जिसमें करीब 55 से 60 बोरी चावल लदी होती है, दूसरे जिलों में भेजी जाती है। बोकारो में 1615 पीडीएस दुकानें, 15 लाख से अधिक हैं लाभुक बोकारो जिले में कुल 1615 पीडीएस दुकानें संचालित हैं। इनमें गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले 3 लाख से अधिक लाल कार्डधारी, 58 हजार से ज्यादा हरा कार्डधारी और 21 हजार से अधिक पीला कार्डधारी हैं। जिले में 15 लाख से अधिक लाभुक हैं, जिन्हें हर महीने प्रति व्यक्ति पांच किलो मुफ्त अनाज दिया जाता है। इतने बड़े पैमाने पर वितरण के बावजूद कालाबाजारी का यह खेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। पीडीएस दुकानों की नियमित जांच हो, लाभुकों का सत्यापन किया जाए और दोषी दुकानदारों, बिचौलियों व व्यापारियों पर सख्त कार्रवाई हो। जब तक इस गठजोड़ को तोड़ा नहीं जाएगा, तब तक गरीबों का हक यूं ही बाजार में बिकता रहेगा। अनाज लेने वाले सक्षम लोगों पर होगी कार्रवाई

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