डाइंग इंडस्ट्री से जुड़े सीईटीपी के ट्रीटेड पानी को बुड्ढा दरिया में डालने के मुद्दे पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक विशेष बैठक बुलाई। इस बैठक में 40, 50 और 15 एमएलडी के तीनों सीईटीपी के संचालकों ने हिस्सा लिया। तीनों सीईटीपी निदेशकों ने बताया कि मंत्रालय के अधिकारियों ने डाइंग इंडस्ट्री का पक्ष गंभीरता से सुना। पीडीए(पंजाब डायर्स एसोसिएशन) के प्रतिनिधियों ने एक छोटी वीडियो दिखाकर बुड्ढा दरिया में इस समय बह रहे साफ पानी की स्थिति और टीडीएस रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। हालांकि “काला पानी मोर्चा’ के नेताओं ने आरोप लगाया कि सीईटीपी का पूरा नियंत्रण पीडीए के पास है और वे मनचाहे समय पर पानी रोक या छोड़ सकते हैं। इस पर पीडीए के निदेशक कमलदेव चौहान ने कहा कि ऐसे आरोपों से राज्यसभा सदस्य और पर्यावरण प्रेमी बलवीर सिंह सीचेवाल की चल रही सफाई मुहिम पर भी सवाल उठते हैं, जबकि वे समय–समय पर बुड्ढा दरिया के पानी का टीडीएस स्वयं चेक करते हैं। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी सीईटीपी और बुड्ढा दरिया के पानी के नियमित सैंपल लेकर जांच करता है। कैंसर जैसी बीमारियों के लिए डाइंग इंडस्ट्री को जिम्मेदार ठहराना गलत पीडीए के महासचिव बॉबी जिंदल ने कहा कि काला पानी मोर्चा डाइंग इंडस्ट्री को कैंसर फैलाने के लिए गलत तरीके से दोषी ठहरा रहा है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक रूप से डाइंग उद्योग के पानी में ऐसा कोई धातु नहीं होता जो कैंसर से जुड़ा हो। उन्होंने बताया कि पीलिया (जॉन्डिस) जैसी बीमारियां बुड्ढा दरिया में गोबर और पशु मल जाने से बनने वाले टोटल कोलीफॉर्म के कारण होती हैं, जिसकी मात्रा आज 18 लाख के करीब है जबकि मानक 500–1000 के बीच है। पीडीए ने राज्यसभा सदस्य सीचेवाल का धन्यवाद किया कि उनकी कोशिशों से बुड्ढा दरिया में पशु मल का बहाव काफी कम हुआ है और समय दूर नहीं जब दरिया का पानी फिर से साफ दिखाई देगा। पीडीए पीडीए नेताओं ने बताया कि डाइंग इंडस्ट्री ने हमेशा सरकार और विभागों द्वारा दी गई पर्यावरण संबंधी हिदायतों का पालन किया है। सीईटीपी भी सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार ही स्थापित किए गए हैं, जिन पर उद्योगों ने करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। हर महीने पानी के ट्रीटमेंट पर भी भारी राशि खर्च किया जा रहा है। तीनों सीईटीपी के प्रतिनिधियों ने मंत्रालय के सामने अपने वकीलों के माध्यम से विस्तृत पक्ष रखा। पीडीए ने कहा कि काला पानी मोर्चा बैठक के तथ्यों को मीडिया में गलत तरीके से प्रचारित कर रहा है, जिसका न तो पीडीए पर और न ही मंत्रालय पर कोई प्रभाव पड़ेगा।


