दतिया जिला अस्पताल में मरीजों के परिजनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक अभिनव और व्यावहारिक पहल की गई है। परिजन की परेशानी को देखते हुए कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने कबाड़ में तब्दील हो चुकी एम्बुलेंस को रेनबसेरा के रूप में उपयोग करने का अनूठा समाधान निकाला। सोमवार दोपहर कलेक्टर वानखड़े ने जिला अस्पताल परिसर में विधिवत पूजन किया, नारियल फोड़ा और फीता काटकर इस रेनबसेरा का उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद इसे मरीजों के परिजनों के उपयोग के लिए सौंप दिया गया। यह रेनबसेरा एक पुरानी और पूरी तरह खराब हो चुकी एंबुलेंस को साफ-सफाई और आवश्यक मरम्मत के बाद तैयार कर बनाया गया है, ताकि इसमें रात के समय सुरक्षित रूप से ठहरा जा सके। इस नई व्यवस्था में एक साथ 4 लोग आराम से बैठ और सो सकते हैं। एंबुलेंस के भीतर पर्याप्त जगह, बिस्तर की व्यवस्था और ठंड से बचाव के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। साथ ही सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है, ताकि परिजन बिना किसी चिंता के रात बिता सकें। इस रेनबसेरा को तैयार करने में आरटीओ विभाग का भी सहयोग रहा है, जिससे बेकार पड़ी सरकारी संपत्ति का उपयोग जनहित में किया जा सका। कलेक्टर वानखड़े ने बताया कि इस तरह की पहल आगे भी जारी रहेगी, अभी तीन से चार और गाड़ियां इसके लिए तैयार की जा रहीं हैं। यह गाड़ियां स्वास्थ्य विभाग से ही ली गई हैं। यहां बताना होगा कि, कलेक्टर वानखड़े जहां-जहां पदस्थ रहे हैं, वहां उन्होंने इस तरह के नवाचार किए हैं। जबलपुर में नगर निगम के कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने कंडम हो चुकी बसों को रेनबसेरा में बदलवाया था, जिससे खुले में रहने वाले लोगों को रात बिताने के लिए सुरक्षित ठिकाना मिला था।


