सिवनी के पेंच टाइगर रिजर्व में बाघिन पीएन-224 को बेहोश कर पकड़ने की कोशिशें पिछले कई दिनों से जारी हैं। राजस्थान के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व भेजने के लिए 28 नवंबर से उसकी तलाश की जा रही है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है। एक दर्जन से अधिक टीमें और हाथियों के चार दल अभियान में लगे हुए हैं। मानव गतिविधियों की वजह से सतर्क हुई पेंच प्रबंधन के अनुसार, लगातार बढ़ रही मानव गतिविधियों की वजह से बाघिन बेहद सतर्क हो गई है और जंगल में गहराई तक छिप रही है। इसी कारण सोमवार से रणनीति में बदलाव कर टीमों की संख्या घटाई गई है, ताकि क्षेत्र में कम से कम व्यवधान रहे और मौके मिलते ही सुरक्षित तरीके से बाघिन को बेहोश कर रेडियो कॉलर लगाया जा सके। कॉलर लगाकर जंगल में छोड़ा जाएगा रेडियो कॉलर लगाने के बाद बाघिन को दोबारा पेंच के जंगल में छोड़ा जाएगा। इसके बाद करीब एक पखवाड़े तक उसके मूवमेंट और व्यवहार पर नजर रखी जाएगी। सबकुछ सामान्य रहने पर निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत उसे राजस्थान भेजने की प्रक्रिया शुरू होगी। टीमों ने सोमवार सुबह फिर से अभियान शुरू किया, लेकिन पूरे दिन की खोजबीन के बावजूद बाघिन का कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष सुराग नहीं मिला। इससे पहले रविवार को बाघिन दिखाई तो दी थी, लेकिन परिस्थितियां अनुकूल न होने के कारण उसे बेहोश नहीं किया जा सका। शनिवार को भी हाथी दल को वह कुछ देर के लिए दिखी थी, मगर पकड़ने का सही मौका नहीं मिल पाया। मानव हस्तक्षेप कम करने पर जोर फील्ड संकेतों से पता चला है कि बढ़ती मानव गतिविधियों से बाघिन की दिन में दिखने की संभावना कम हो गई है। इसी वजह से मंगलवार से सीमित टीमों के साथ तलाशी अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है, ताकि मानव हस्तक्षेप घट सके और बाघिन अपनी प्राकृतिक गतिविधियों में लौट आए। इससे उसे सही समय पर बेहोश कर सुरक्षित तरीके से पकड़ने में आसानी होगी। पहली बार दूसरे राज्य भेजा जाएगा बाघ बाघिन को पकड़ने के बाद हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट कर राजस्थान भेजा जाएगा। इसके लिए भारतीय सेना का हेलिकॉप्टर इस्तेमाल किया जाएगा। यह पहली बार होगा जब मध्यप्रदेश से किसी बाघ को एयरलिफ्ट कर दूसरे राज्य में भेजा जा रहा है। इंटर-स्टेट टाइगर ट्रांसलोकेशन की यह योजना इसलिए शुरू की गई है, ताकि राजस्थान में मौजूद बाघों के जीन पूल में सुधार हो सके। नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज के अध्ययन में पाया गया कि रणथंभौर में इन-ब्रीडिंग की दर देश के अन्य टाइगर रिजर्व की तुलना में दोगुनी है। नया जीन पूल तैयार करने की योजना एक ही जीन पूल में लगातार प्रजनन के कारण शावकों के जन्म में कमी, उनके पालन-पोषण की क्षमता में गिरावट और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। इसी वजह से अन्य राज्यों से बाघों को लाकर नया जीन पूल तैयार करने की योजना बनाई गई है। इसी क्रम में सबसे पहले पेंच की यह बाघिन राजस्थान भेजी जा रही है। इसके बाद मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ तथा महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधेरी से भी बाघ और बाघिन भेजने की तैयारी है।


