सिवनी के पेंच नेशनल पार्क में बाघिन पीएन-224 की तलाश लगातार जारी है। इस बाघिन को देश की पहली अंतरराज्यीय बाघ ट्रांसफर योजना के तहत राजस्थान के बूंदी जिले में स्थित रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व भेजा जाना है। इसके लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान की संयुक्त टीमें बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। मंगलवार को दिखी थी बाघिन, ट्रेंक्युलाइज करने से पहले हुई गायब करीब ढाई से तीन साल की इस बाघिन को मंगलवार को कुरई रेंज में एक टीम ने देखा था। संदेश मिलते ही उसे डार्ट मारकर ट्रेंक्युलाइज करने की तैयारी की गई, लेकिन इससे पहले कि टीम कुछ कर पाती, बाघिन घने जंगल में ओझल हो गई। देर शाम तक तलाश जारी रही, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। बुधवार से बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन बुधवार सुबह सभी कैमरा ट्रैप स्टेशनों की जांच की गई, लेकिन बाघिन की तस्वीर कहीं नहीं मिली। इसके बाद उसके मूवमेंट वाले इलाकों में लगभग एक दर्जन टीमें उतारी गईं।
सर्चिंग में मदद के लिए चार हाथी दल भी लगाए गए हैं, साथ ही पगमार्क तलाशे जा रहे हैं। पूरी टीम जंगल के कोने-कोने की जांच कर रही है। रुखड़ क्षेत्र में एक पिंजरा युक्त वाहन भी तैनात किया गया है। ऑपरेशन में पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह, राजस्थान वाइल्डलाइफ के सीसीएफ सुगनाराम जाट और वेटरनरी डॉक्टर तेजेन्द्र सिंह रियार मौजूद रहे। देश में पहली बार हो रहा इंटरस्टेट ट्रांस लोकेशन राजस्थान में बाघों का जीन पूल मजबूत करने के लिए देश में पहली बार राज्यों के बीच बाघों का ट्रांसफर किया जा रहा है। पहले चरण में पेंच की बाघिन पीएन-224 को भेजने की तैयारी है।
योजना के अनुसार, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से कुल 7 बाघ-बाघिन राजस्थान भेजे जाएंगे। बफर एरिया में ज्यादा रहती है बाघिन जानकारी के मुताबिक पीएन-224 कोर एरिया की बजाय बफर एरिया में अधिक घूमती है। इसलिए दूसरे दिन का सर्च ऑपरेशन भी रुखड़ और कुरई रेंज के बफर इलाकों पर केंद्रित रहा। एयरलिफ्ट होकर जाएगी राजस्थान, बनेगा नया रिकॉर्ड बाघिन को पकड़ने के बाद उसे वायुसेना के हेलिकॉप्टर से एयर लिफ्ट कर राजस्थान ले जाया जाएगा। यह देश में पहली बार होगा जब किसी बाघिन को एक राज्य से दूसरे राज्य एयर लिफ्ट किया जाएगा। हालांकि, 2008 में एक बाघ को भी एयरलिफ्ट किया गया था, लेकिन वह राजस्थान के रणथंभौर से राजस्थान के ही सरिस्का ले जाया गया था। अभियान में पूरी सावधानी बरत रहे डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि यह खोज और निगरानी प्रक्रिया कुछ दिनों तक जारी रह सकती है। बाघिन को सुरक्षित तरीके से पकड़ना और बिना किसी जोखिम के राजस्थान भेजना ही प्राथमिकता है। पूरा अभियान बेहद सावधानी और दोनों राज्यों के बेहतर समन्वय के साथ चलाया जा रहा है। टी-3 को पकड़ने में लगे थे 40 दिन इससे पहले नवंबर 2009 में पेंच से बाघ टी-3 को पन्ना टाइगर रिज़र्व भेजा गया था। उसे ट्रैक कर ट्रेंक्युलाइज करने में 40 दिन लग गए थे। सड़क मार्ग से भेजने के 10 दिन बाद वह फिर रिज़र्व से बाहर चला गया था, जिसे दोबारा पकड़कर 26 दिसंबर 2009 को पन्ना में छोड़ा गया था।


