पेड़ों की अंधाधुंध कटाई रोकने को सख्त कानून की मांग:समिति ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

हनुमानगढ़ में राज्य वृक्ष खेजड़ी और राज्य पुष्प रोहिड़ा सहित अन्य पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को रोकने के लिए प्रभावी कानून बनाने की मांग तेज हो गई है। इस मांग को लेकर जम्भेश्वर प्राणी हितकारी समिति और पर्यावरण संघर्ष समिति के बैनर तले पर्यावरण प्रेमियों ने सोमवार को मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। समिति पदाधिकारियों ने बताया कि राज्य में विभिन्न विकास परियोजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जा रही है, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 600 दिनों से पर्यावरण संरक्षण को लेकर धरना जारी है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बालोतरा, फलौदी और बीकानेर जिलों में अब तक लाखों खेजड़ी, जाल, कुमट और फोग जैसे पेड़ काटे जा चुके हैं। पर्यावरण प्रेमियों ने कहा कि हाल ही में प्रदेश के कानून मंत्री ने 1955 के कानून में जुर्माना राशि 100 रुपए से बढ़ाकर 1000 रुपए करने की जानकारी दी थी। हालांकि, उन्होंने इसे वर्तमान समय में अप्रभावी बताते हुए कहा कि यह राशि पेड़ों की कटाई को नहीं रोक सकती। ज्ञापन में मांग की गई कि पेड़ों की सुरक्षा के लिए एक सशक्त ट्री एक्ट बनाया जाए, जिसमें अवैध कटाई पर कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान हो। इसके अतिरिक्त, किसी भी परियोजना को मंजूरी देने से पहले पेड़ों की गिनती कर जियो टैगिंग की जाए और ग्राम पंचायत या नगर पालिका से अनिवार्य रूप से एनओसी ली जाए। प्रत्येक परियोजना के साथ ग्रीन बेल्ट विकसित करना भी अनिवार्य किया जाए। पर्यावरण प्रेमियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते प्रभावी कानून नहीं बनाया तो 2 फरवरी को बीकानेर मुख्यालय पर बेमियादी महापड़ाव शुरू किया जाएगा। इस दौरान मनोज कुमार, राजेन्द्र प्रसाद, पवन डेलू, काशीराम, अंकुश, संदीप, रामनिवास, पुनीत, सुल्तान, सत्यनारायण, विजय, बलवीर सहित कई पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे।

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