पॉलिटिकल रिपोर्टर| रांची मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि पेसा कानून के तहत किए गए उपबंधों का क्रियान्वयन इस तरह हो, जिससे राज्य के अनुसूचित क्षेत्र में स्थानीय स्वशासन की परंपरा को मजबूती मिले। साथ ही साथ जनजातीय समुदायों का आर्थिक व सामाजिक उत्थान और सशक्तीकरण हो सके। मुख्यमंत्री सोमवार को आवासीय कार्यालय में राज्य के महाधिवक्ता राजीव रंजन एवं आलाधिकारियों के साथ पेसा नियमावली पर उच्च स्तरीय बैठक कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने विभागीय प्रधानों को पेसा नियमावली पर जल्द मंतव्य देने का निर्देश दिया। पहली बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विभागीय सचिवों और आलाधिकारियों के साथ पेसा कानून और संबंधित ड्राफ्ट नियमावली की गहन समीक्षा की। लगभग डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक में नियमावली के प्रावधानों की बारीकी से जानकारी ली। उन्होंने राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में पारंपरिक एवं स्थानीय स्वशासन व्यवस्था के तहत ग्राम सभाओं को दी जाने वाली शक्तियों को लेकर कई जरूरी निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल, पेयजल सचिव एमआर मीणा, विधि विभाग के प्रधान सचिव नीरज कुमार श्रीवास्तव, वित्त सचिव प्रशांत कुमार, उत्पाद सचिव अमिताभ कौशल, कल्याण सचिव कृपानंद झा, ग्रामीण विकास सचिव के. श्रीनिवासन, पंचायती राज सचिव मनोज कुमार, समाज कल्याण सचिव मनोज कुमार, राजस्व सचिव चंद्रशेखर, खान सचिव अरवा राजकमल, पंचायती राज निदेशक राजेश्वरी बी, निदेशक खान राहुल सिन्हा, महाधिवक्ता राजीव रंजन, पीसीसीएफ अशोक कुमार, वन संरक्षक पीआर नायडू, डीएफओ दिलीप कुमार, कृषि विभाग के विशेष सचिव प्रदीप कुमार हजारी मौजूद थे। मालूम हो कि राज्य में अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायती राज व्यवस्था पेसा अधिनियम 1996 के प्रावधानों को प्रभावी बनाने के लिए पेसा नियमावली का गठन किया जाना है। पंचायती राज विभाग ने पेसा नियमावली के औपबंधिक प्रारूप के संबंधित प्रावधानों पर शीघ्र मंतव्य के लिए सात अगस्त को सभी संबंधित विभाग को फाइल भेजी थी। इस पर अब तक नौ विभागों ने अपना मंतव्य पंचायती राज विभाग को नहीं सौंपा है। इनमें पीएचईडी, उत्पाद एवं मद्य निषेध, राजस्व एवं भूमि सुधार, खान एवं भूतत्व, कल्याण, महिला एवं बाल विकास, कृषि और वन एवं पर्यावरण विभाग शामिल हैं।


