पैसे हैं तो रिम्स में तत्काल ऑपरेशन, आयुष्मान से हैं तो कीजिए इंतजार

रिम्स के कार्डियोलॉजी विभाग में आयुष्मान के तहत भर्ती मरीजों को एंजियोप्लास्टी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। पेसमेकर लगवाने आए मरीजों को भी परेशानी हो रही है। एंजियोग्राफी के लिए भी कम से कम 4 से 5 दिन का समय लग रहा है। लेकिन अगर कैश में इलाज कराना है तो यह 24 से 48 घंटे के भीतर ऑपरेशन कर एंजियोप्लास्टी हो जा रही है। इसमें दोष विभाग व चिकित्सकों का नहीं है, बल्कि सिस्टम का है। जिसका खामियाजा आयुष्मान के मरीज भुगत रहे हैं।ॉ क्योंकि आयुष्मान के तहत पहले मरीजों को भर्ती होना पड़ता है। इसके बाद आयुष्मान का फॉर्म भरकर खुद को रजिस्टर कराना होता है। अप्रूवल आने में कई बार दो से तीन दिन का समय लग जाता है। इसके बाद यदि एंजियोप्लास्टि करानी है तो स्टेंट के लिए इंडेंट किया जाता है। इंडेंट होने के बाद रिम्स प्रबंधन को एजेंसी सप्लाई करती है, जिसके बाद चिकित्सक मरीजों के ऑपरेशन के लिए आगे की प्रक्रिया करते हैं। लेकिन मरीजों के सर्जिकल आइटम इंडेंट होने के बाद रिम्स पहुंचने में 7 से 10 दिन का समय लग रहा है। नतीजन, आयुष्मान के मरीजों को समय पर इलाज मिलने में परेशानी हो रही है। कार्डियो-सीटीवीएस के लिए ढाई साल में नहीं बना अलग स्टोर रिम्स के कार्डियोलॉजी व सीटीवीएस में आय दिन इस तरह की परेशानी होती है। इन परेशानियों के मद्देनजर दिसंबर 2022 में स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने निरीक्षण के क्रम में दोनों विभागों के लिए अलग स्टोर का संचालन करने का निर्देश दिया था। पायलट प्रोजेक्ट के तहत तत्काल इस व्यवस्था को लागू करने के लिए रिम्स से प्लान मांगा गया था। लेकिन ढ़ाई साल बाद भी न तो अलग स्टोर बना और न ही मरीजों की परेशानी दूर हुई। कुछ मामलों में सप्लायर की ओर से होता है थोड़ा विलंब राजेंद्र कुमार (55) हजारीबाग के रहने वाले हैं। उनके हार्ट में एक वॉल्व में 95% और दूसरे में 60% तक ब्लॉकेज है। बीते 14 मार्च को कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती हुए थे। इंप्लांट नहीं होने से सर्जरी रुकी हुई है। मरीज ने बताया कि आयुष्मान के तहत भर्ती हुए हैं। प्रक्रिया हो गई है, लेकिन अबतक एंजियोप्लास्टी नहीं हो सकी है। पूछने पर डॉक्टर ने इंतजार करने को कहा था, लेकिन अभी दो-तीन दिन से डॉक्टर छुट्टी पर हैं। एक वाल्व 90% बंद, एंजियोप्लास्टी के लिए 8 दिन से इंतजार मुन्ना देवी (65), गिरिडीह की रहने वाली हैं। 8 दिन पहले कार्डियोलॉजी विभाग में एडमिट हुई हैं। बेटे सुबोध कुमार ने बताया कि घर में गिर गई थी, फिर चक्कर आया और सांस रुक गई थी। आनन- फानन में अस्पताल ले जाने पर रिम्स रेफर किया गया। रिम्स में जांच के बाद 90% तक ब्लॉकेज बताया गया। एंजियोप्लास्टि होनी है। डॉक्टर ने स्टेंट खरीदकर लाने को कहा था। पर मैंने बताया पैसे नहीं है तो आयुष्मान का फॉर्म सोमवार को भरकर जमा किया है। 95% से ज्यादा ब्लॉकेज, 18 दिन बाद भी एंजियोप्लास्टी नहीं इसलिए देर… मरीज के भर्ती होने के बाद आयुष्मान पोर्टल में एक्टिव होने पर ही सर्जिकल आइटम का जाता है ऑर्डर, सप्लाई में लगते हैं 7 दिन

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