बीकानेर में एनडीपीएस कोर्ट नहीं होने के कारण मामलों की सुनवाई और फैसलों में देरी हो रही है। हनुमानगढ़ में 650 और श्रीगंगानगर में 400 मामले होने पर वहां स्पेशल कोर्ट में सुनवाई हो रही है, जबकि बीकानेर जिले में उनसे कहीं अधिक 816 केस विचाराधीन होने के बावजूद एनडीपीएस कोर्ट नहीं खोली गई है। बीकानेर जिले में नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त तेजी से बढ़ी है और बड़े पैमाने पर डोडा-पोस्त की तस्करी कर पंजाब ले जाया जाता है। इससे पुलिस थानों में मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन सुनवाई के लिए एनडीपीएस की स्पेशल कोर्ट नहीं है। अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संख्या एक को अतिरिक्त चार्ज दे रखा है। इसके अलावा नोखा, खाजूवाला, श्रीडूंगरगढ़ के एडीजी न्यायालयों को भी अतिरिक्त चार्ज दे रखा है। इससे इन न्यायालयों में ना तो मूल मामलों की सुनवाई समय पर हो पा रही है और ना ही एनडीपीएस के मामलों का निपटारा समय पर हो रहा है। न्यायालयों में पांच से 10 सालों से एनडीपीएस के मामले विचाराधीन चल रहे हैं। प्रदेश के 8 जिलों में एनडीपीएस के 11 स्पेशल कोर्ट हैं जिनमें सुनवाई की जाती है। इनमें हनुमानगढ़ में 650 और श्रीगंगानगर में 400 मामलों की स्पेशल कोर्ट में ट्रायल चल रही है। जबकि, बीकानेर में 816 केस लंबित हैं। करीब 200 में पुलिस ने अभियुक्तों को जेसी-पीसी कर रखा है। इसके बावजूद एनडीपीएस कोर्ट नहीं खोला गया है। न्यायिक कर्मचारी और वकील लंबे समय से एनडीपीएस कोर्ट की आवश्यकता जता रहे हैं। राज्य के बजट में इसकी घोषणा किए जाने की उम्मीद भी जताई जा रही थी, लेकिन एनडीपीएस की स्पेशल कोर्ट खोलने की घोषणा नहीं की गई। कौन से जिले में, कितनी कोर्ट जयपुर – 2, जोधपुर – 2, श्रीगंगानगर – 1, हनुमानगढ़ – 1, भीलवाड़ा – 1, झालावाड़- 1, कोटा – 1, प्रतापगढ़ – 1, श्रीगंगानगर – 1 कौनसी कोर्ट में कितने मामले पेंडिंग नेता, मंत्री, अधिकारी, संस्था-संगठन को दबाव बनाकर खुलवाना चाहिए एनडीपीएस कोर्ट : बिस्सा न्यायिक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष गिरिराज बिस्सा का कहना है कि बीकानेर में मादक पदार्थों का गौरखधंधा तेजी से बढ़ा है। इसे देखते हुए नेता, मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी, संस्था-संगठन नशे की प्रवृति रोकने के लिए समय-समय पर अभियान चलाते हैं। इन्हें बीकानेर में एनडीपीएस कोर्ट खोलने के लिए सरकार पर दबाव बनाना चाहिए। एनडीपीएस के मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। कोर्ट में इन मामलों की गवाही में भी समय लगता है। अनुसंधान अधिकारी के बयान तो एक दिन में पूरा होना मुश्किल ही होता है। ऐसे में लंबी प्रक्रिया चलती है। स्पेशल कोर्ट ना होने के कारण एनडीपीएस के मामलों में 10 सालों तक फैसले नहीं हो पाते। पीठासीन अधिकारी के पास मूल मामलों की सुनवाई का भी दबाव रहता है। इसलिए बीकानेर में एनडीपीएस कोर्ट की सख्त आवश्यकता है। शर्मा ने कहा- संभाग मुख्यालय पर एनडीपीएस कोर्ट ना होना दुर्भाग्यपूर्ण बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक शर्मा का कहना है कि बीकानेर जिला संभाग मुख्यालय है जहां मादक पदार्थों के मामलों की संख्या न्यायालयों में 1000 पहुंचने वाली है। जिले में रजिस्टर्ड करीब 3000 वकीलों, न्यायिक कर्मचारियों को उम्मीद थी कि बीकानेर जिले में एनडीपीएस कोर्ट खोल दी जाएगी। लेकिन, उनके हाथ निराशा लगी। न्यायिक परिसर में एनडीपीएस कोर्ट के लिए जगह उपलब्ध है। दूसरे जिलों में जहां एनडीपीएस कोर्ट है, वहां से कहीं ज्यादा मामले पेंडिंग चल रहे हैं। इसके बावजूद एनडीपीएस कोर्ट का नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण हैं। सरकार को शीघ्र ही एनडीपीएस कोर्ट खोलनी चाहिए जिससे कि ट्रायल जल्दी पूरी हो और अपराधियों को सजा मिल सके। निर्दोष लोग बेवजह जेल में बंद ना रहें। पिछले तीन सालों में एनडीपीएस के मुकदमे वर्ष मुकदमे 22 217 23 325 24 385 बीकानेर जिले में नशे की जड़े गहराई तक पहुंच गई हैं और खासकर युवा वर्ग इसकी चपेट में आ रहा है। एमडी, अफीम, चरस, डोडा-पोस्त जैसे नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त अब आम बात हो गई है। इसलिए पुलिस को भी नशे के खिलाफ अभियान चलाने पड़ रहे हैं। पुलिस थानों में मुकदमों की संख्या बढ़ रही है। जेल में विचाराधीन बंदियों और कोर्ट में मामलों की संख्या लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है। इसके अलावा बीकानेर जिला नशीले पदार्थ, खासकर डोडा-पोस्त की तस्कर बायपास बना हुआ है। जोधपुर, फलौदी, चित्तौड़गढ़ से डोडा-पोस्त, अफीम बड़े पैमाने पर तस्करी कर बीकानेर जिले से होते हुए पंजाब-हरियाणा ले जाई जाती है। ट्रक, कार, जीप में भरे लाखों रुपए के डोडा-पोस्त पकड़े जाते हैं। ऐसे मामलों की सुनवाई और जल्दी न्याय के लिए एनडीपीएस कोर्ट जरूरी है। बीकानेर जेल से ग्रामीण कोर्ट में ले जाना पड़ता है बंदियों को: ग्रामीण इलाकों की नोखा, खाजूवाला, श्रीडूंगरगढ़ में एडीजे स्तर की कोर्ट को एनडीपीएस मामलों की सुनवाई के लिए अधिकृत किया गया है। ग्रामीण इलाकों में दर्ज मुकदमों में गिरफ्तार किए गए मुल्जिमों को तारीख पर ग्रामीण इलाकों की कोर्ट में ही ले जाना पड़ता है। प्रदेश के 8 जिलों में 11 स्पेशल कोर्ट, बीकानेर बन रहा तस्करी का बाइपास एडीजे नं 1 617 एडीजे नोखा 80 एडीजी श्रीडूंगरगढ़ 22 एडीजे खाजूवाला 21 सीजेएम बीकानेर 19 एसीजेएम नं. 1 बीकानेर 17 जेजेबी बीकानेर 14 एसीजेएम खाजूवाला 4 सीजे-जेएम नं. 3 बीकानेर 1 सीजे-जेएम खाजूवाला 8 एएमजेएम नं. 1 बीकानेर 5 एएमजेएम नं. 2 बीकानेर 8


