डॉक्टरों ने बताया कि 2021-22 में उनका इंटरव्यू हुआ था, जो कि 2019 की पात्रता के आधार पर लिया गया था। 2023 में 38 लोगों को प्रमोशन दे दिया गया, जबकि 26 डॉक्टरों को उनके शोध प्रकाशनों को आधार बनाकर रोक दिया गया। इसके बाद इन पब्लिकेशन की जांच के लिए पांच कमेटियां गठित की गईं। चौथी और पांचवीं कमेटी ने सकारात्मक रिपोर्ट दी, फिर भी उन्हें प्रमोशन नहीं मिला। 2019 के प्रभाव से उन्हें एडिशनल प्रोफेसर बनाया जाता, तो 2023 में ही वे सभी प्रोफेसर बन चुके होते। रांची | रिम्स में प्रमोशन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। रिम्स के ही प्रमोशन प्राप्त चिकित्सक दो गुटों में बंट गए हैं। कुछ चिकित्सक प्रमोशन से खुश हैं, तो कुछ काफी नाराज हैं। दरअसल, संस्थान के 26 सीनियर डॉक्टर समय पर प्रमोशन न मिलने से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। इनका कहना है कि वर्ष 2019 में ही उन्हें एडिशनल प्रोफेसर बना दिया जाना चाहिए था, लेकिन तमाम प्रक्रियाएं पूरी होने पर भी उनका प्रमोशन रोका गया। अब जब 2023-24 से प्रमोशन लिस्ट जारी की गई है, तो न सिर्फ उनकी सीनियरिटी चली गई है, बल्कि उनके जूनियर डॉक्टर उनसे ऊपर हो गए हैं। आरोप है कि जिन डॉक्टरों को उन्होंने पढ़ाया, वे अब उनके सीनियर बन गए हैं। सर्जरी विभाग के डॉ. संदीप ने 2005 में रिम्स में योगदान दिया था। उन्होंने बताया कि उनके छात्र रहे डॉ. नीशिथ एक्का ने 2016 में नौकरी जॉइन की, लेकिन अब उन्हें 2023 के प्रभाव से एडिशनल प्रोफेसर के पद पर प्रोन्नति दी गई। गुरुवार को माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सभागार में नवप्रोन्नत चिकित्सकों की एक बैठक में शामिल अपर प्राध्यापक डॉ. नीशिथ एक्का ने कहा कि वे मरीजों के हित में हड़ताल नहीं करेंगे, लेकिन विरोध दर्ज कराने के लिए अन्य लोकतांत्रिक तरीकों का सहारा जरूर लेंगे। डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने प्रमोशन के लिए तय सभी प्रक्रियाओं और नियमों का पूरी तरह पालन किया है। इंटरव्यू के बाद योग्यता के आधार पर उन्हें पदोन्नति दी गई है, जिसे अब रद्द करना अन्याय होगा। प्रोन्नत डॉक्टरों ने कहा- प्रमोशन रद्द किया, तो होगा आंदोलन


