प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में सनातन धर्म और आस्था की महत्वपूर्ण परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत 21 विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई, जिसमें महंत डॉ नरेशपुरी महाराज को सनातनश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। महाकुंभ की महिमा को प्रकट करते हुए बताया गया कि यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का महासंगम है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले अमृत कुंभ की रक्षा में सूर्य, चंद्र, गुरु और शनि की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इन ग्रहों की विशेष स्थिति पर ही कुंभ का आयोजन होता है। महाकुंभ का धार्मिक महत्व इतना अधिक है कि एक बार स्नान करने का फल हजार अश्वमेध यज्ञ, सौ वाजपेय यज्ञ, लाख बार भूमि प्रदक्षिणा और करोड़ बार नर्मदा स्नान के बराबर माना जाता है। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, सम्राट हर्षवर्धन के समय में प्रयाग के संगम क्षेत्र में हर पांचवें वर्ष ‘महामोक्ष परिषद’ का आयोजन होता था। कुंभ का मूल उद्देश्य विविधता को एकता में परिवर्तित करना और सामाजिक समरसता स्थापित करना है। इसमें 18 अधीन देशों के राजा सम्मिलित हुए थे। यह समारोह लगभग ढाई महीने तक चला। सम्राट ने बारी बारी से महात्मा बुद्ध भगवान सूर्य तथा शिव प्रतिमाओं की पूजा की थी। प्रयाग के इस धार्मिक समारोह के अवसर पर वह गरीबों में दान भी किया करता था। यहां तक कि व्यक्तिगत आभूषणों तक को दान कर देता था। महाकुंभ की शुरुआत कब से हुई यह शोध का विषय है। इस पर तर्क वितर्क हो सकते हैं लेकिन यह महाउत्सव शाश्वत रूप से चलता रहेगा यह सुनिश्चित है। इस महाकुंभ के हम साक्षी हैं। आने वाले का कोई और बनेगा। भारत के महाकुंभ में नवीन विचारों के आगमन का सिलसिला नदियों की धारा के साथ प्रवाहमान होता रहेगा। नये नये दर्शनों से महाकुंभ भरता रहेग। यह आस्था है जो व्यक्ति को व्यक्ति के निकट लाती है। यह उत्सव है जो व्यक्ति को समाज से जोड़ता है। ये विचार प्रयागराज में सेक्टर आठ में मेंहदीपुर बालाजी धाम के कैंप में सनातन और महाकुंभ पर आयोजित परिचर्चा में सामने आए ! इस अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि प्रयागपुत्र राकेश के शुक्ला रहे ! इस अवसर महंत डॉ नरेश पूरी महाराज ने कहा की प्रयागराज में महाकुंभ में आना ही बड़ी बात है। जीवन में इससे बड़ा कुछ हो नहीं सकता। इस अवसर संस्कृति युवा संस्था के संस्थापक अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा ने कहा कि महंत डॉ नरेश पूरी महाराज ने मेहंदीपुर बालाजी धाम में कार्यभार सम्भाला है तब से सनातन और संस्कृति के लिए अनवरत कार्य कर रहे है और सामाजिक सरोकार के हर कार्य में आप अग्रणी रहते है। कार्यक्रम में महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज ने कहा कि “वसुधैव कुटुम्बकम” भारत के चिन्तन का आधार है। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य विश्व में बालाजी महाराज की चमत्कारिक शक्तियों से जनमानस को लाभ पहुंचाना हैं। इसके साथ ही उन्होंने सभी लोगो से हनुमान महाराज के चरित्र को पढ़ने का आग्रह किया। कार्यक्रम में प्रयागपुत्र राकेश के शुक्ला, संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा, यज्ञ फाउंडेशन के अध्यक्ष गोविंद नारायण पारीक, संत समिति, राजस्थान के अध्यक्ष सियाराम दास महाराज, संयुक्त भारतीय धर्म संसद के अध्यक्ष आचार्य राजेश्वर, पंचमुखी हनुमान मंदिर महंत रामराज दास और पंडित राजकुमार चतुर्विद ने सनातन श्री सम्मान पत्र भेंट किया ।


