प्रवासी साहित्य पर रिसर्च के लिए मिली PHD:जोधपुर की मनोहर कंवर ने डेनमार्क की अर्चना पैन्यूली के साथ स्टडी की

जोधपुर जिले के बालेसर खुड़ियाला निवासी मनोहर कंवर भाटी को जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय ने हिंदी साहित्य में पीएचडी की उपाधि प्रदान की है। उन्हें यह उपाधि ‘अर्चना पैन्यूली के कथा साहित्य का समीक्षात्मक अध्ययन’ विषय पर किए गए रिसर्च के लिए मिली। जो उन्होंने रिसर्च निर्देशक डॉ. कीर्ति माहेश्वरी के निर्देशन में पूरा किया।​ मनोहर कंवर ने भारतीय मूल की डेनिश लेखिका अर्चना पैन्यूली के कथा साहित्य पर केंद्रित शोध किया है। अर्चना पैन्यूली वर्तमान में डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में रहती हैं। हिंदी, अंग्रेजी तथा डेनिश-तीनों भाषाओं में भारतीय प्रवासी समाज तथा डेनिश समाज से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।​ शोध में प्रवासी भारतीयों के जीवनानुभव, अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव, नए देश और समाज में आने वाली चुनौतियों और इन परिस्थितियों की साहित्यिक अभिव्यक्ति का विश्लेषण किया गया है। मनोहर के अध्ययन में पैन्यूली के उपन्यास और कहानियों के माध्यम से स्त्री अनुभव, सांस्कृतिक टकराव, परिवार, रिश्तों और प्रवास के मनोवैज्ञानिक पक्षों पर भी प्रकाश डाला गया है।​ प्रवासी साहित्य को नई दृष्टि अर्चना पैन्यूली के कथा-साहित्य पर आधारित यह शोध प्रवासी साहित्य जैसे विस्तृत और समकालीन क्षेत्र में नई दृष्टि प्रस्तुत करता है। मनोहर कंवर भाटी ने अपने शोध में दिखाया है कि किस तरह प्रवासी भारतीय नई भूमि की चुनौतियों के बीच भी भारतीय जीवन-मूल्यों और भाषाई पहचान को बचाए रखने की जद्दोजहद करते हैं और साथ ही नई संस्कृति के सकारात्मक पक्षों को भी अपनाते हैं।​ प्रस्तावना और अध्याय-विन्यास में प्रवासी साहित्य की अवधारणा, अर्चना पैन्यूली के व्यक्तित्व और रचनात्मक यात्रा, उनके उपन्यासों एवं कहानी संकलनों का समीक्षात्मक अध्ययन, पात्र-चर्चा तथा भाषा और शिल्प-संयोजन जैसे पहलुओं को क्रमबद्ध रूप से शामिल किया गया है। इस कार्य को विभागीय स्तर पर प्रवासी हिंदी साहित्य के गंभीर और उपयोगी योगदान के रूप में देखा जा रहा है।​ पीएचडी उपाधि प्राप्त करने के बाद मनोहर कंवर भाटी ने अपने मार्गदर्शक डॉ. कीर्ति माहेश्वरी, विश्वविद्यालय प्रशासन और शोध यात्रा में सहयोग देने वाले साथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनके परिवार और गांव के लिए भी गर्व का विषय है। वे आगे भी प्रवासी साहित्य तथा समकालीन हिंदी कथा-साहित्य पर रिसर्च और लेखन का कार्य जारी रखेंगी।​

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