इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट (आईआईएफएम) सत्र 2025-26 से दो नए एमबीए प्रोग्राम शुरू करेगा। जिनमें एमबीए(सस्टेनेबल डेवलपमेंट) और एमबीए (डेवलपमेंट एंड सस्टेनेबल फाइनेंस) शामिल हैं। फॉरेस्ट्री मैनेजमेंट और सस्टेनेबिलिटी मैनेजमेंट पर पहले से चले आ रहे पुराने पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा प्रोग्राम को पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री (एमबीए) प्रोग्राम में तब्दील कर दिया है। खास बात यह है कि आईआईएफएम को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त हो चुका है। अब संस्थान को प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में विभिन्न शैक्षणिक प्रोग्राम शुरू करने की ऑटोनॉमी है। इंस्टीट्यूट ने चारों एमबीए प्रोग्राम्स में प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक उम्मीदवार 31 दिसंबर 2024 तक आवेदन कर सकते हैं। चारों प्रोग्राम में 375 सीट है। इंस्टीट्यूट अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बढ़ा रहा है। हाई क्वालिफाइड फैकल्टी को रिक्रूट करने की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। पीजी डिप्लोमा प्रोग्राम को डिग्री प्रोग्राम में बदलने की मांग लंबे समय से चल रही थी आईआईएफएम के एडमिशन चेयरपर्सन डॉ. मधुर जैन बताते हैं कि पीजी डिप्लोमा प्रोग्राम को डिग्री प्रोग्राम में बदलने की मांग लंबे समय से चल रही थी। स्टूडेंट्स डिप्लोमा कोर्स की अपेक्षा डिग्री प्रोग्राम में एडमिशन लेना अधिक पसंद करते हैं। इसलिए डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा हसिल करने के बाद पीजी डिप्लोमा प्रोग्राम को एमबीए में बदला गया है। प्रोग्राम की अवधि दो साल की ही रहेगी। हालांकि डिप्लोमा प्रोग्राम्स में स्टूडेंट्स की रुचि अच्छी रही है। इनमें करीब 90% प्रतिशत तक एडमिशन होते रहे हैं। इस बार इस संख्या को पूर्ण 100% तक पहुंचाने का टारगेट है। इन बदलावों के कारण उम्मीद जताई जा रही है कि आईआईएफएम को नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में भी अच्छी रैंक मिल सकेगी। चार प्रोग्राम की खासियत एमबीए(सस्टेनेबल डेवलपमेंट) प्रोग्राम का उद्देश्य सतत विकास के लिए एक बहु-विषयी दृष्टिकोण विकसित करना और इसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, संस्थागत और लैंगिक आयामों की जांच को प्रोत्साहित करना है। एमबीए (डेवलपमेंट एंड सस्टेनेबल फाइनेंस) प्रोग्राम का उद्देश्य वित्तीय पेशेवरों के बीच ऐसी दक्षताओं का विकास करना है, जो वित्तीय साधनों को डिजाइन कर सकें, जो हितधारकों के लिए मूल्य निर्माण करें और इस प्रकार सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करें। 2025-26 से पीजीडीएफएम (पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन फॉरेस्ट्री मैनेजमेंट) को एमबीए (फॉरेस्ट्री मैनेजमेंट) और पीजीडीएसएम (पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन सस्टेनेबिलिटी मैनेजमेंट) को एमबीए (सस्टेनेबिलिटी मैनेजमेंट) के नाम से जाना जाएगा। एमबीए (फॉरेस्ट्री मैनेजमेंट) इस क्षेत्र में अपनी तरह का एकमात्र प्रोग्राम है जो प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन के लिए पेशेवरों को तैयार करता है। एमबीए (सस्टेनेबिलिटी मैनेजमेंट) का उद्देश्य पेशेवरों को मैनेजेरियल, टेक्निकल, एनालिटिकल और सोशल स्किल के साथ मूल्यों के मिश्रण के साथ तैयार करना है। प्रवेश प्रक्रिया और पात्रता आईआईएफएम, कैट-2024, जैट-2025, मैट-2024/2025 (फरवरी), सीमैट 2024/2025 और जीमैट-2024 के स्कोर के आधार पर उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करेगा।
पर्सनल इंटरव्यू के लिए केंद्र- शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के लिए व्यक्तिगत साक्षात्कार का आयोजन अहमदाबाद, भोपाल, दिल्ली, गुवाहाटी, चेन्नई, बेंगलुरु और कोलकाता में किया जाएगा।


