जालंधर| सिटी के उद्यमियों को पंजाब स्टेट डेवलपमेंट टैक्स के नोटिस मिले हैं। ये टैक्स 2018 में लगाया गया था। इसके अनुसार मालिक को अपने मुलाजिमों से महीने का 200 रुपया टैक्स लेकर पंजाब सरकार के खाते में जमा करना होता है। इसे साधारण भाषा में प्रोफेशनल टैक्स कहा जाता है। हर मुलाजिम का सालाना टैक्स 2400 बन रहा है। दिक्कत ये है कि पहले कांग्रेस के समय ये टैक्स खत्म करने के वादे हुए, फिर वर्तमान सरकार में नरमी रही। ऐसे में लाखों मुलाजिमों ने टैक्स जमा नहीं कराया। इनके मालिकों को नोटिस मिले हैं। जालंधर की इंजीनियरिंग इंडस्ट्री एसोसिएशन ने वीरवार को मीटिंग की। सरकार से ये टैक्स बंद करने की मांग की गई। कारोबारियों ने कहा कि पंजाब में प्रोत्साहन देने वाली इंडस्ट्रियल पॉलिसी लांच की गई। एसोसिएशन के प्रधान सुनील शर्मा ने कहा कि पंजाब के जीएसटी अफसरों की ड्यूटी प्रोफेशनल टैक्स वसूली की है। इन अफसरों ने कई इंडस्ट्रियल यूनिट्स को प्रोफेशनल टैक्स में पंजीकरण न करवाने पर शो-कॉज नोटिस भेजे हैं। जिससे उद्यमियों में बेचैनी और भ्रम बढ़ गया है। अध्यक्ष सुनील शर्मा ने पंजाब सरकार से मांग की है कि इस मामले में तुरंत राहत दी जाए।


