विकास कार्य पूरी तरह ठप : मुखिया फंड न मिलने के कारण विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं। जनता रोज सवाल पूछती है, लेकिन हमारे पास जवाब नहीं है। हम खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने वोट देकर भरोसा जताया है, लेकिन बिना फंड के वादों को पूरा करना संभव नहीं। प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि सरकार की उदासीनता के कारण हजारों योजनाएं अटक गई हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का गंभीर संकट पैदा हो गया है और जनता में सरकार व प्रशासन के प्रति नाराज़गी बढ़ रही है। टाटीझरिया प्रखंड में विकास कार्यों की बहाली और फंड जारी होने की प्रतीक्षा में ग्रामीण और पंचायत प्रतिनिधि लगातार उम्मीद लगाए बैठे हैं। भास्कर न्यूज | दारू झारखंड में पंचायत चुनाव संपन्न हुए दो साल बीत चुके हैं, लेकिन टाटीझरिया प्रखंड की आठ पंचायतों में विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। वित्तीय वर्ष 2024–25 और 2025–26 के लिए अब तक फंड जारी नहीं होने से प्रखंड की हजारों स्वीकृत योजनाएं फाइलों में ही अटकी रह गई हैं। इससे ग्रामीण विकास पर बड़ा असर पड़ा है और पंचायती राज व्यवस्था की उपयोगिता पर भी सवाल उठने लगे हैं। फंड न मिलने के कारण सड़क निर्माण, नाली मरम्मत, पेयजल आपूर्ति, सामुदायिक भवन, शौचालय निर्माण, आंगनबाड़ी केंद्र जैसी बुनियादी योजनाएं वर्षों से अधर में हैं। पंचायत सचिवालयों में योजनाओं की फाइलें धूल खा रही हैं, जबकि ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधियों का दर्द-जनता पूछती है, लेकिन हम बेबस हैं टाटीझरिया मुखिया संघ के अध्यक्ष सुरेश यादव, स्वस्तिका कुमारी, शिबू प्रसाद सोनी, कुमारी माधुरी, रेखा देवी, ममता देवी, कांति देवी और सुमित्रा कुमारी ने फंड संकट पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उनका कहना है कि प्रखंड से लेकर जिला और राज्य स्तर पर कई बार लिखित व मौखिक आग्रह किया गया, आंदोलन भी हुए, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। “


