कृष्ण कांत सिंह | हजारीबाग वन विभाग ने हाथियों को मानव बस्ती से दूर रखने के लिए एक नई पहल शुरू की है। इसके लिए विभाग ने सोलर पैनल वाला सायरन लगना शुरू किया है। इस नई पहल से हाथियों के आतंक से मुक्ति मिलने की संभावना है। इस संबंध में चरही के प्रभारी फॉरेस्टर शैलेन्द्र कुमार ने बताया कि चिचिकला के बिंकरवा और रौता गांव में हाथियों को मानव बस्तियों से दूर रखने और हाथियों को उनके कॉरिडोर तक सीमित करने के लिए इस मशीन को लगाया गया है। इसको अस्सी अस्सी मीटर की दूरी पर लगाया गया है। कहा एक मास्टर डिवाइस और बाकी सपोर्टिंग डिवाइस है। मास्टर डिवाइस पर ग्रामीण या वन विभाग के कर्मी को हाथियों के बारे में जानकारी होने पर वे उस डिवाइस के नंबर पर फोन कॉल करते है, सभी डिवाइस मधुमक्खी जैसा आवाज़ करना शुरू कर देता हैं। हाथी उसकी आवाज से परेशान होकर दूर जंगल में चले जाते हैं। वन विभाग के लिए हाथियों को उसके अपने कॉरिडोर में सीमित रखना इन दिनों एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। वन रक्षी राजेंद्र प्रसाद ने बताया की बरकट्ठा के सिमरिया, चलकुशा प्रखंड के बड़ानो, मनैया मे साईरण लगाया गया है जो ऐप के द्वारा ऑपरेट किया जाता है। बात दें कि हाथी जंगलों से निकलकर गांव की ओर चले आते हैं। भारी संख्या में इसे फसलों और मवेशियों की हानि ग्रामीणों को उठानी पड़ रही है। इसके अलावा हाथियों ने कई ग्रामीणों को कुचलकर मार भी दिया है। मामले के जानकार सूरज कहते हैं कि आज की तारीख में झारखंड की सबसे बड़ी समस्या हाथियों के आतंक से ग्रामीणों की रक्षा करना है। नए तरह के डिवाइस से कितनी मदद मिलती है इसके लिए तो अभी थोड़ा इंतजार करना होगा साथ हीं कुछ अन्य उपाय भी तलाशने होंगे। इस बात का ध्यान रखना होगा कि यह सुरक्षित रहे। सोनडीहा तुरिवार दारू के किसान छवि प्रसाद कहते है की हमारे गांव में इस तरह का कोई डिवाइस अभी नहीं लगाया गया है। अभी भी हमारे गांव के बगल के जंगल में एक हाथी है। लेकिन सबसे ज्यादा खतरा तब होता है जब हांथी झुंड में होते हैं। दो माह पूर्व यहां हाथियों का झुंड आतंक मचाए हुए था। वन विभाग से निवेदन है कि ऐसे डिवाइस हमारे यहां भी तुरंत लगाए जाए। हाथी जंगलों से निकलकर आ जाते हैं


