शहर में जाली एनओसी लगाकर रजिस्ट्री करने का खेल लगातार जारी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक इस बड़े घोटाले में बड़ी मछली पर कार्रवाई न करते हुए छोटे-छोटे प्यादों पर कार्रवाई की जा रही है। ताजा घटनाक्रम में तहसील पश्चिमी में हुईं संदिग्ध रजिस्ट्री के मामले में डीसी की शिकायत पर पुलिस ने डीएम डेवलपर्स की एक रजिस्ट्री को अवैध बताते हुए 2 दिसंबर 2025 को नई एफआईआर दर्ज की है। बीएनएस की धारा 318(4), 336(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2), 82 के तहत दर्ज एफआईआर में पुलिस ने प्लॉट बेचने वाले डेवलपर के पार्टनर जोगा सिंह पुत्र निरंजन सिंह और बलजिंदर कौर प|ी अवतार सिंह को भले ही नामजद करते हुए केस दर्ज किया है, लेकिन मामले में एनओसी को मंजूरी देने और रजिस्ट्री को मंजूर करने वाले सब-रजिस्ट्रार को इस एफआईआर से दूर ही रखा गया है। कार्रवाई की जिम्मेदारी दूसरे पर डाल रहे अफसर यूं हुआ था मामले का खुलासा गौरहोकि सोशल वर्कर दमनप्रीत सिंह ने पूरे प्रकरण की शिकायत कर घोटाले का खुलासा किया था, जिसके बाद ग्लाडा ने कई आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। मामले की शिकायत सीबीआई और मुख्यमंत्री से की गई है। गलाडा ने खुद करीब 34 जाली एनओसी की सूची विजिलेंस विभाग को लिखित में 297/दिसंबर 2024 को सौंपी है, जिसमें साफ लिखा गया कि ये एनओसी उसकी ओर से जारी नहीं की गई हैं। 26 केस अभी भी लंबित हैं जिनके लिए एनओसी जारी ही नहीं की गई थी। सिर्फ एनओसी के लिए अप्लाई किया गया था। अप्लाई की रसीद पर ही रजिस्ट्रियां होती रहीं। गौर होकि कमिशनर ने 16 दिसंबर 2024 को डीसी को अलर्ट करते हुए पत्र नंबर 2258 जारी किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि “मॉल अधिकारी मिले हुए हैं।”


