भास्कर न्यूज | लुधियाना पंजाब के निजी (गैर-सहायता प्राप्त) स्कूलों के लिए ई-पंजाब पोर्टल पर फीस स्ट्रक्चर का पूरा ब्योरा अपलोड करने की आज (31 जुलाई) अंतिम तिथि है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित समय के बाद पोर्टल बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद जिन स्कूलों ने सत्र 2023-24 से 2026-27 तक की फीस संबंधी जानकारी अपलोड नहीं की या गलत अथवा अधूरी जानकारी दी, उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पंजाब सरकार ने पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) अध्यादेश-2026 के तहत सभी निजी स्कूलों के लिए चार शैक्षणिक सत्रों की फीस का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन सार्वजनिक करना अनिवार्य किया है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य निजी स्कूलों द्वारा निर्धारित 5 प्रतिशत सीमा से अधिक फीस वृद्धि पर निगरानी रखना और फीस व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है। पहले फीस डिस्क्लोजर की अंतिम तिथि 25 जुलाई तय की गई थी, लेकिन बड़ी संख्या में स्कूलों द्वारा पोर्टल पर जानकारी अपलोड नहीं किए जाने के कारण इसे बढ़ाकर 31 जुलाई कर दिया गया। इसके बावजूद अंतिम दिनों तक कई स्कूलों का डेटा लंबित रहा। शिक्षा विभाग के अनुसार समय सीमा समाप्त होने के बाद ऐसे स्कूलों की सूची तैयार की जाएगी जिन्होंने अब तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। इसके बाद जिला स्तरीय नियामक समिति उनकी जांच करेगी। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में नोटिस जारी करने, जुर्माना लगाने, मान्यता रद्द करने अथवा एनओसी वापस लेने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। अंतिम तिथि से पहले लुधियाना के करीब 70 प्रतिशत निजी स्कूल फीस डिस्क्लोजर का डेटा पोर्टल पर अपलोड कर चुके थे। जिले के कुल 1222 निजी स्कूलों में से लगभग 800 स्कूलों ने जानकारी जमा कर दी थी, जबकि 400 से अधिक स्कूलों का डेटा शेष था। फिलहाल यह केवल डेटा अपडेटेशन की प्रक्रिया है और आगे की कार्रवाई या नीति संबंधी निर्णय स्कूल शिक्षा सचिव एवं हेड ऑफिस स्तर पर ही लिया जाएगा। जिन स्कूलों ने फीस नहीं बढ़ाई, उन्हें भी डेटा अपलोड करने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। पूरा डेटाबेस ऑनलाइन और पारदर्शी है और हेड ऑफिस सभी जिलों की प्रगति पर लगातार नजर रखे हुए है। निजी स्कूल संगठन के प्रतिनिधि का कहना है कि उनके संगठन के करीब 99 प्रतिशत सदस्य स्कूल पोर्टल पर फीस संबंधी जानकारी अपलोड कर चुके हैं। उनके अनुसार सरकार के आदेश के खिलाफ कुछ संस्थाओं द्वारा हाई कोर्ट में याचिका दायर किए जाने से कई स्कूल असमंजस में थे, लेकिन संगठन ने अपने सदस्यों को सरकार द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने की सलाह दी। प्रतिनिधि का कहना है कि पहले 8 प्रतिशत फीस वृद्धि का प्रावधान था, जबकि बाद में सरकार ने 5 प्रतिशत की सीमा तय कर दी। उनका आरोप है कि छोटे और कम फीस वाले स्कूलों पर अपेक्षाकृत अधिक दबाव बनाया जा रहा है, जबकि बड़े स्कूलों पर इसका असर कम दिखाई देता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार फीस वापस कराने जैसी कार्रवाई करना चाहती है तो पहले उसका स्पष्ट मानदंड सार्वजनिक किया जाना चाहिए। कई स्कूलों को पोर्टल पर फीस डिस्क्लोजर फॉर्म भरने की प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी, इसलिए तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई गई।


