बच्चों के बीच पल गुजारने से दिल को सुकून मिलता है : मनोज जालान

भास्कर न्यूज | गिरिडीह समाजसेवा की न तो कोई उम्र होती है और न ही कोई बड़े आर्थिक स्रोत की जरूरत है। बल्कि यह एक जज्बा व जुनून है, बस एक सोच की जरूरत है। हमारे गिरिडीह जिले में ऐसे हजारों समाजसेवी हैं, जो अपने-अपने अंदाज में समाजसेवा के क्षेत्र में काम रहे हैं। उसी में से एक हैं गिरिडीह-टुंडी रोड स्थि​त दर्जी मोहल्ला निवासी मनोज जालान। जिनका भले ही कोई बड़ा कारोबार या व्यवसाय नहीं है, लेकिन समाजसेवा के क्षेत्र में इनकी बेहद सकारात्मक सोच है। कोई भी पर्व-त्योहार अपने घर में मनाने से पहले ये उन गरीब बच्चों के बीच मनाते हैं, जिन्हें नसीब नहीं है। लिहाजा होली, दीवाली, दुर्गापूजा हो या फिर मकर संक्रांति, जन्माष्टमी या फिर न्यू ईयर सेलिब्रेट। त्योहार से संबंधित व्यंजन लेकर ये उन सुदूर इलाकों में जाते हैं जहां के लोग त्योहारों का मर्म भी नहीं जानते। वहां बच्चों की टोली के बीच त्योहार के अनुरूप मिठाई, बिस्किट, टॉफी, खिलौने, रंग, पिचकारी, पटाखे बांटते हैं। मनोज का कहना है कि सिर्फ त्योहार ही नहीं बल्कि आम दिनों में भी वे अलग-अलग सुदूर इलाकों में पहुंचते हैं। वहां बच्चों व बुजुर्गों के बीच साथ घंटों कैसे बीत जाता है पता भी नहीं चलता है। इससे मन में गजब का सुकून मिलता है। अब ये आदत बन चुकी है। सप्ताह-दो सप्ताह में जब तक नहीं जाते हैं मन को शांति नहीं मिलता है।

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