सतना जिले के चित्रकूट क्षेत्र के पौसलहा गांव स्थित नवीन सरस्वती ज्ञान सागर स्कूल ने अभिभावकों को मोबाइल के अत्यधिक उपयोग के प्रति जागरूक करने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है। स्कूल के बच्चों ने तख्तियां दिखाकर माता-पिता से पूछा है कि उनके लिए मोबाइल अधिक महत्वपूर्ण है या बच्चों की मुस्कान। यह पहल आधुनिक दौर में माता-पिता और बच्चों के बीच बढ़ती डिजिटल दूरी को कम करने का प्रयास है। इस अभियान के तहत, नन्हें बच्चों से ऐसे स्लोगन और वाक्य लिखवाए जा रहे हैं जो सीधे अभिभावकों को संबोधित करते हैं। एक पोस्टर पर बच्चों ने लिखा, “मम्मी-पापा! आप जैसा हमें बनाएंगे, हम वही बनेंगे… मोबाइल छोड़ कर हमारा साथ दीजिए।” यह भावनात्मक अपील समाज में तेजी से बढ़ती डिजिटल व्यस्तता पर एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। शिक्षक अशोक ने बताया कि पहले माता-पिता बच्चों को खेल-खेल में बोलना, पढ़ना और नैतिक व्यवहार सिखाते थे। कहानियों और बातचीत से बच्चों का सर्वांगीण विकास होता था। हालांकि, अब मोबाइल की व्यस्तता ने रिश्तों की गर्माहट कम कर दी है। बच्चों को माता-पिता की उपस्थिति और संवाद की आवश्यकता है, न कि केवल उनकी कमाई या सुविधाओं की। मुहिम को गांव में काफी सराहना मिल रही
स्कूल के प्रधानाध्यापक विद्या सागर पटेल ने जानकारी दी कि हाल ही में हुई अर्धवार्षिक परीक्षा के परिणाम संतोषजनक नहीं रहे। समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि बच्चों और अभिभावकों दोनों में मोबाइल की लत एक बड़ी समस्या है। इसी कारण विद्यालय स्तर पर यह प्रयास किए जा रहे हैं। श्री पटेल का मानना है कि यह पहल समाज को जीवन की वास्तविक प्राथमिकताओं पर सोचने के लिए प्रेरित करेगी। बच्चों की इस अनोखी मुहिम को गांव में काफी सराहना मिल रही है और अभिभावकों ने भी इसे एक सकारात्मक संदेश के रूप में स्वीकार किया है। बच्चों की यह मासूम आवाज एक महत्वपूर्ण चेतावनी है जिसे अब हर परिवार को गंभीरता से सुनना चाहिए।


