मध्यप्रदेश में लगातार फर्टिलिटी रेट गिरता जा रहा है। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे की रिपोर्ट बताती हैं बीते 10 साल में मध्यप्रदेश में जन्मदर में 12.8 फीसदी की कमी आई है। ऐसे में नए कपल में माता-पिता बनने के लिए आईवीएफ तकनीक की मांग तेजी से बढ़ी है। यही कारण हैं कि सागर मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में शहर का 12वां ऐसा आईवीएफ और फर्टिलिटी सेंटर शुरू हुआ है। इन सेंटर में आईवीएफ, ICSI, IUI, टेस्ट ट्यूब बेबी और अन्य प्रजनन तकनीकों पर उपचार, परामर्श और टेस्टिंग सुविधाएं मौजूद हैं। जबकि छोटे सेंटर भी जोड़े जाएं तो यह संख्या 20 के पार पहुंचती है। जबकि एक दशक पहले गिने चुने सेंटर ही भोपाल में मौजूद थे। इन निजी सेंटर में आईवीएफ प्रक्रिया के लिए एक दंपती पर 2 से 4 लाख रुपए तक का खर्च आता है। जो एक बड़ी आबादी के लिए दे पाना मुश्किल है। यही नहीं, एम्स भोपाल और गांधी मेडिकल कॉलेज में 3 साल पहले आईवीएफ सेंटर शुरू करने की बात कही गई थी। जो अब तक शुरू नहीं हो सका है। जिससे गरीब निसंतान दंपती की कोख सूनी ही बनी हुई है। इधर, सागर आईवीएफ और फर्टिलिटी सेंटर को लीड कर रहीं आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. पूर्णिमा तिवारी का कहना है कि उनके पास जो 100 कपल आते हैं उनमें से 40 प्रतिशत तक को माता-पिता बनने के लिए IVF की जरूरत पड़ रही है। पहले यह तकनीक आयुष्मान योजना के तहत कवर होती थी। जिससे गरीब दंपत्ति भी इसका फायदा ले पाते थे। लेकिन, अब इस पैकेज को स्कीम से हटा दिया गया है। हालांकि, कुछ कॉर्पोरेट ऑफिसेस में एम्प्लॉयज को आईवीएफ तकनीक अपनाने पर कुछ आर्थिक सहायता देने की नई प्रक्रिया शुरू हुई है। जो एक अच्छी पहल है। आईवीएफ कोई बुराई नहीं, 31 तक फ्री परामर्श
एसएमएच आईवीएफ और फर्टिलिटी सेंटर का उद्घाटन मुंबई से आई आईवीएफ पायनियर डॉ. नंदिता पालशेतकर ने किया था। इस मौके पर फर्टिलिटी सेंटर की प्रमुख एवं डॉ. पूर्णिमा तिवारी ने बताया कि सेंटर निसंतान दंपतियों को 31 दिसंबर 2025 तक फ्री परामर्श के साथ-साथ आईवीएफ उपचार पैकेजों पर छूट प्रदान करेगा । उन्होंने आगे कहा कि आईवीएफ कोई बुराई नहीं हैं। यह एक ट्रीटमेंट प्रोसीजर है। हर निसंतान दंपति को इसे अपनाना चाहिए। इस प्रक्रिया को लेकर नॉर्मलाइज होना जरूरी है। आज भी कई ऐसे दंपत्ति आतें हैं, जो आईवीएफ प्रक्रिया अपना रहे हैं। लेकिन, चाहते हैं कि घर के अन्य सदस्यों को यह पता ना चले कि वो इस प्रक्रिया के जरिए माता-पिता बन रहे हैं। घोषणा के 3 साल बाद भी नहीं बने सरकारी IVF सेंटर साल 2022 में सरकार ने ऐलान किया था कि सरकारी IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन सेंटर खोले जाएंगे, ताकि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को महंगे निजी इलाज पर निर्भर न रहना पड़े। शुरुआत भोपाल से होनी थी और आगे अलग-अलग शहरों की 6 मेडिकल कॉलेजों में सुविधा देने की योजना थी। लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी न तो एक भी सेंटर शुरू हो पाया और न ही जमीन पर कोई ठोस काम हुआ। कहीं टेंडर रद्द हुए, तो कहीं फाइलें अटक गईं। ऐसे में हजारों दंपत्ति अब भी इंतजार में हैं। एम्स भोपाल में IVF सेंटर शुरू करने के लिए दो बार टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई थी। योजना के अनुसार, एक निजी एजेंसी को एम्स द्वारा दी गई जगह पर सेंटर बनाना था। लेकिन विभागीय मतभेदों के चलते दोनों बार टेंडर रद्द कर दिए गए। एम्स के स्त्री रोग विभाग के एक वरिष्ठ डॉक्टर के अनुसार, चयनित एजेंसी को लेकर प्रशासन और चिकित्सकों के बीच सहमति नहीं बन पाई। IVF शुरू करने से पहले एम्स ने इनफर्टिलिटी क्लिनिक और IVF स्किल लैब भी शुरू की थी, लेकिन अब वह लैब भी बंद पड़ी है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए समाधान IVF नियम सख्त हुए, एज लिमिट पर बहस जारी ऐसा है जनसंख्या का अनुमान
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के ताजा विश्लेषण के अनुसार 2024 में मप्र के 20 से 29 साल आयुवर्ग के युवाओं की आबादी 1 करोड़ 53 लाख 82 हजार है। 2047 तक इसी कैटेगरी में युवाओं की संख्या 1 करोड़ 49 लाख 93 हजार ही रहेगी। यानी 23 साल बाद युवा आबादी बढ़ने की बजाय कम हो जाएगी। इसके विपरीत 2024 में मप्र के 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की आबादी 57 लाख 12 हजार है। 2047 तक इसी कैटेगरी में बुजुर्गों की संख्या 1 करोड़ 82 लाख तक पहुंच जाएगी। रिपोर्ट में 2.0 पर आई प्रजनन दर नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) की रिपोर्ट (2019-21) देखें तो मप्र में मौजूदा प्रजनन दर 2.0 है। 2015-16 की रिपोर्ट में ये दर 2.3 थी। यानी युवाओं की संख्या में लगातार कमी आ रही है। इस बीच बढ़ती स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण जीवन प्रत्याशा दर में बढ़ोतरी हो रही है।


