बजट में झारखंड के पर्यटन की उपेक्षा; मंईयां योजना का 10 हजार रु. भी ​नहीं मिला: राधाकृष्ण

झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्रीय बजट की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा था कि सरकार ने तीन कर्तव्यों को केंद्र में रखकर बजट बनाया है- विकास की गति तेज करना, क्षमताओं का निर्माण करना और यह सुनिश्चित करना कि विकास समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे। उनके वक्तव्य से उम्मीद जगी थी कि केंद्रीय बजट में कुछ ठोस और सार्थक प्रावधान देखने को मिलेंगे, पर इस बजट ने निराश किया। कृषि, उद्योग, एमएसएमई शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, पर्यटन एवं पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए जो प्रावधान किए गए हैं, वे न केवल अपर्याप्त हैं, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से कोसों दूर हैं। राज्य को उग्रवाद मिला था विरासत में, कई प्रक्षेत्रों में थी आर्थिक सहयोग की उम्मीद
राज्य गठन के पूर्व झारखंंड देश के अति पिछड़ा प्रदेश बिहार का एक हिस्सा था। उग्रवाद की समस्या राज्य को विरासत में मिली। राज्य और केंद्रीय पुलिस बल की कार्रवाई से उग्रवाद नियंत्रित तो हुआ है, पर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कई प्रक्षेत्रों में झारखंड को केंद्र से आर्थिक सहयोग की उम्मीद थी, पर बजट में नहीं मिला। खनन और उद्योग : राहत और टीस झारखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ खनन है। बजट में कोयला, लिग्नाइट और लौह अयस्क की बिक्री पर टीसीएस की दर को तर्कसंगत बनाते हुए 2% करने का प्रस्ताव है। यह कर संरचना को स्पष्ट करेगा। साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए पूंजीगत वस्तुओं के आयात पर सीमा शुल्क में छूट दी गई है, जो झारखंड में प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाने के लिए निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित कर सकता है। हालांकि यहां एक टीस भी दिखाई देती है। बजट में ‘रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट’ के लिए एक विशेष योजना की घोषणा की गई, लेकिन इसके लिए ओडिशा, केरल, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु का नाम लिया गया, जबकि झारखंड का नाम नदारद था। खनिज संपन्न राज्य होने के बावजूद इस हाई-टेक वैल्यू चेन से बाहर रह जाना राज्य के लिए चिंता का विषय है। इसके अलावा, पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर को औद्योगिक कॉरिडोर का नोड बनाया गया है, लेकिन झारखंड के किसी शहर के लिए ऐसी विशिष्ट घोषणा नहीं हुई ।
केंद्रीय बजट झारखंड के लिए संजीवनी व सवाल दोनों केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश आम बजट ने विकसित भारत के रोडमैप को स्पष्ट किया है। बजट 2026-27 झारखंड को सीधे तौर पर कोई बड़ा नया उद्योग या विशेष आर्थिक पैकेज नहीं देता, लेकिन रांची के संस्थान का उन्नयन और पूर्वोदय योजना में हिस्सेदारी राज्य के लिए सकारात्मक संकेत है। वैसे यह राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की सक्रियता पर भी निर्भर करेगा कि वे पर्यटन और ई-बसों की केंद्रीय योजनाओं का अधिकतम लाभ कैसे उठाते हैं। यह बजट झारखंड के लिए एक मिश्रित तस्वीर पेश करता है। जहां एक ओर राजधानी रांची को स्वास्थ्य क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर की सौगात मिली है, वहीं दूसरी ओर ‘पूर्वोदय’ के नाम पर खनिज संपदा वाले इस राज्य से कुछ औद्योगिक अवसर छिटकते हुए भी दिखाई देते हैं। यहां झारखंड के लिए बजट के प्रमुख पहलुओं के विश्लेषण से लगता है कि झारखंड के लिए इस बजट की सबसे बड़ी सुर्खी स्वास्थ्य क्षेत्र से है। वित्त मंत्री ने संसद में स्वीकार किया कि उत्तर भारत में मानसिक स्वास्थ्य के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों की कमी है। इस कमी को पूरा करने के लिए रांची स्थित केंद्रीय मन: चिकित्सा संस्थान को अपग्रेड कर क्षेत्रीय शीर्ष संस्थान का दर्जा देने की घोषणा की गई है। यह न केवल रांची के लिए बल्कि पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है। इससे राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और ट्रॉमा केयर की सुविधाओं में व्यापक सुधार होगा और केंद्रीय फंडिंग का रास्ता साफ होगा। झारखंड की 7 प्रमुख मांगों को किया दरकिनार डॉ. धीरजमणि पाठक, अर्थशास्त्री बजट में झारखंड ‘ग्रामीण और महिला सशक्तीकरण झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए ‘शी-मार्ट’’ की घोषणा महत्वपूर्ण है। यह योजना लखपति दीदी कार्यक्रम का विस्तार है, जिसके तहत स्वयं सहायता समूहों के लिए खुदरा आउटलेट बनाए जाएंगे। झारखंड में सखी मंडलों का नेटवर्क बहुत मजबूत है और यह योजना ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने में ‘गेम-चेंजर’ साबित हो सकती है। ‘पूर्वोदय’ का वादा : पर्यटन और परिवहन सरकार ने पूर्वी भारत (पूर्वोदय) के राज्यों को विकास का इंजन माना है। झारखंड इस योजना के केंद्र में है। बजट में पांच पूर्वोदय राज्यों में 5 नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने का प्रस्ताव है। झारखंड को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि वह अपनी प्राकृतिक सुंदरता (जैसे बेतला, नेतरहाट) या धार्मिक स्थलों (जैसे पारसनाथ, देवघर) के लिए इनमें से एक स्लॉट सुरक्षित करे। इसके अलावा, पूर्वोदय राज्यों के लिए 4,000 ई-बसों का प्रावधान किया गया है। रांची, जमशेदपुर और धनबाद जैसे प्रदूषण से जूझ रहे शहरों के लिए यह परिवहन व्यवस्था में सुधार का बड़ा मौका है। इलेस्ट्रेशन : गौतम चक्रवर्ती रोको-रोको… पूर्वोदय एक्सप्रेस में हमारी सीट भी कन्फर्म करो…

वित्त मंत्री राधाकृष्ण ने कहा कि देश में निवेश-सकल घरेलू उत्पाद अनुपात पिछले कई वर्षों से लगातार कम हुआ है। इसे बढ़ाए बिना देश की विकास दर प्राप्त करना संभव नहीं है। इस अनुपात को बढ़ाने के लिए क्या रणनीति अपनाई जाएगी, इस विषय में बजट मौन है। बजट में विदेशी मुद्रा विनिमय दर को स्थिर करने या सोना-चांदी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया है। कुछ वर्षों से भारतीय मुद्रा लगातार कमजोर होती जा रही है, लेकिन इन गंभीर परिस्थितियों के समाधान के लिए कोई पहल का उल्लेख नहीं है। केंद्रीय बजट में झारखंड की घोर उपेक्षा की गई। यहां के लिए न तो नई रेल लाइन-ट्रेन की घोषणा की गई और न ही कृषि सिंचाई और सामाजिक प्रक्षेत्रों को ही कोई स्थान दिया गया है। 1. मनरेगा योजना अंतर्गत केंद्र और राज्य के बीच 60% और 40% खर्च के बंटवारे से झारखंड को अतिरिक्त बोझ पड़ने पर लगभग 5000 करोड़ रुपए केंद्र से मांगा गया था। 2. खेतों की सिंचाई क्षमता की वृद्धि के िलए अगले 4 वर्षों तक लगातार झारखंड को 2000 करोड़ रुपए की मांग की गई थी। 3. माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के कर युक्तिकरण से हर वर्ष झारखंड को होनेवाले 4000 करोड़ रुपए क्षति की भरपाई की मांग केंद्र सरकार से की गई थी। 4. बिहार की तर्ज पर 10 हजार रुपए झारखंड की मइयांओं को भी उद्यमिता के लिए केंद्र से मांगा गया था। 5. झारखंड में पर्यटन के विकास के लिए बजट में कोई स्थान नहीं िदया गया। 6. विभिन्न कंपनियों के पास झारखंड का एक लाख 36 हजार करोड़ रुपए बकाया राशि का भुगतान भी नहीं किया गया। 7. झारखंड के लिए कई नई ट्रेन या रेल लाइन की घोषणा इस बजट में नहीं की गई है।

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