बड़वानी की सबसे बड़ी सौंफ मंडी में किसान व्यापारियों की कथित मनमानी का शिकार हो रहे हैं। आरोप है कि सौंफ के सीजन में व्यापारी किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनकी उपज औने-पौने दामों पर खरीद रहे हैं। अन्य जिलों से आ रहे किसानों को अपनी उपज कम दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस संबंध में मंडी प्रशासन का कहना है कि यह किसान और व्यापारी के बीच का मामला है और दाम उन्हें मिलकर तय करने चाहिए। सौंफ का सीजन अब धीरे-धीरे अपने चरम पर पहुंच रहा है और बड़वानी कृषि उपज मंडी में सौंफ की आवक लगातार बढ़ रही है। हाल ही में, रविवार को मंडी में 123 बोरियों में करीब 80 क्विंटल से अधिक सौंफ की आवक दर्ज की गई। इस दौरान सौंफ का भाव 55 रुपये से लेकर 140 रुपये प्रति किलोग्राम तक रहा। कम भाव मिलने से कई किसान परेशान और नाराज दिखे। मनावर के किसान राजाराम ने बताया कि सौंफ के उत्पादन में बहुत मेहनत और अधिक खर्च आता है, लेकिन उन्हें सही दाम नहीं मिलते। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यापारी अक्सर गुणवत्ता ठीक नहीं बताकर कम भाव देते हैं। कुक्षी के किसान संजय जमरे ने भी कहा कि भाव इतने कम मिल रहे हैं कि लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। धार के डेहरी लोंगसारी से आए किसान गुलाब ने बताया कि वह तीन थैले सौंफ लाए थे, जिसके लिए उन्हें केवल 90 रुपये प्रति किलोग्राम का भाव मिला। उन्होंने कहा कि दूसरी सौंफ मंडी दूर होने के कारण उनके पास यहीं उपज बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसान तेरसिंह की सौंफ भी अलग-अलग भाव पर बिकी, कुछ को 90 रुपये और कुछ को 110 रुपये प्रति किलोग्राम का भाव मिला। कृषि उपज मंडी सचिव सुमन बड़ोले ने बताया कि मंडी में बिकने आ रही उपज का भाव मंडी द्वारा नहीं तय किया जाता। समर्थन मूल्य का भाव सरकार तय करती है। सौंफ के भाव में समर्थन मूृल्य नहीं मिलता। व्यापारी और किसान मिलकर भाव तय करते है। हमारे कर्मचारी इस पर नजर रखते है। माल की क्वालिटी के अनुसार ही भाव तय किया जाता है।


