भारतीय प्रवासी पक्षी लिटिल कॉर्मोरेंट (छोटा जलकाग) हिमालय रेंज के लेह-लद्दाख से 2 हजार किमी से ज्यादा का सफर कर वन विहार के किनारे बड़ा तालाब पहुंचे हैं। पक्षी विशेषज्ञ डॉ. संगीता राजगीर ने बताया कि ये सफर करते हुए उन शहरों से गुजरते हैं, जहां तालाब होते हैं। ये हजारों के झुंड में सफर करते हैं। इनका शिकार सिर्फ मछलियां होती हैं। इनकी तीन प्रकार की प्रजातियां होती हैं- लिटिल कॉर्मोरेंट, लार्ज कॉर्मोरेंट और इंडियन शैग। भोपाल में सबसे ज्यादा प्रवास करने वाली प्रजातियों में लिटिल कॉर्मोरेंट यानी छोटे जलकाग होती है। ये पक्षी शिकार पकड़ने के लिए पानी में 3 मीटर गहराई तक गोता लगा सकते हैं। एक छोटा जलकाग 2 किलो तक की मछली का शिकार करने की क्षमता रखता है। ऐसे रचते हैं व्यूह रचना ये गोलाकार बनाकर पानी के बीच में गैप छोड़कर तैरने लगते हैं। जहां मछलियों का झुंड होता है, वहां पानी को खलबलाते हैं। जब मछलियां घबराकर पानी के ऊपर आती हैं, ये उनका शिकार करते हैं।


