वैदिक ऋचाएं, मंत्रोच्चार, कर्मकांड सीखने के साथ बटुक इंडोर और आउटडोर खेल में भी पारंगत बनेंगे। चिंतामण गणेश स्थित श्री महाकाल वैदिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान में बटुकों के लिए खेल मैदान बनाया जा रहा है। उनके लिए खेल उपकरण भी जुटाए जा रहे हैं। इस परिसर से अब तक मंत्रोच्चार सुनाई देते थे। उसका क्रम आगे भी जारी रहेगा लेकिन इसके साथ सुबह, शाम मैदान पर क्रिकेट, टेनिस जैसे खेल में भी बटुक पसीना बहाते दिखाई देंगे। इसके अलावा वे इनडोर खेल के तौर पर शतरंज, कैरम में भी दिमागी घोड़े दौड़ाएंगे। शोध संस्थान में वर्तमान में 87 विद्यार्थी हैं, जो कर्मकांड के साथ वैदिक अध्ययन में जुटे हैं। इन बटुकों की दिनचर्या में अब खेल को भी शामिल किया जाएगा। किसी भी अन्य स्कूल या कॉलेज की तरह यहां भी खेल मैदान बनाया जाएगा। जहां पर सुबह, शाम खेल का अभ्यास करवाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर यहां खेल प्रशिक्षक की सेवाएं भी ली जाएंगी। बटुकों की रुचि का ध्यान रखा जाएगा महाकालेश्वर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक ने वैदिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान का निरीक्षण में उन्होंने बटुकों से पूछा कितने बटुक खेलों में रुचि रखते हैं। जो जवाब मिला, उससे प्रशासक भी हतप्रभ थे। शत-प्रतिशत बटुकों ने कहा- वे कोई न कोई खेल खेलना चाहते हैं। प्रशासन ने फिर पूछा कितने बटुक शतरंज खेलते हैं या खेलना चाहते हैं। इस बार 65 बटुकों ने हाथ उठाए। प्रशासक ने कहा- जितने विद्यार्थियों ने यहां खेलों में रुचि दिखाई वह अदभुत है। उनकी रुचि का ध्यान रखा जाएगा।


