विष्णु मंडल | पबिया पबिया पंचायत के पहरुडीह गांव में आज भी लोगों को लिए सड़क एक सपना ही है। इस गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए अबतक पक्की सड़क का निर्माण नहीं कराया गया है। गांव के लोग दशकों से सड़क की मांग कर रहे हैं। करीब 3 किलोमीटर लंबी सड़क की जरूरत है, जिससे गांव मुख्य सड़क से जुड़ सके। यह इलाका आदिवासी बहुल है, फिर भी इस गांव में सड़क नहीं बनीं। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए वह अपनी निजी जमीन सरकार को देने को भी तैयार हैं, बावजूद इसके सड़क का निर्माण नहीं कराया जा रहा है। पहरुडीह के देविलाल सोरेन, निष्पत्ति हांसदा, सुनील बेसरा, संजय हांसदा समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि यह पंचायत का सबसे पिछड़ा इलाका है। पक्की सड़क तो दूर, समुचित कच्चा रास्ता भी नहीं है। बरसात में इस रास्ते पर चलना काफी मुश्किल हो जाता है। गांव पूरी तरह मुख्यधारा से कट जाता है। बीमार लोगों को समय पर अस्पताल नहीं ले जाया जा सकता। एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंचती है। जिससे मरीजों की हालत बिगड़ जाती है। कई बार गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि जनप्रतिनिधि कई बार आए। वादे किए, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। देविलाल सोरेन ने कहा कि मंत्रीजी ने कई सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास किया, लेकिन पहरुडीह हर बार योजना से बाहर रह गया। चुनाव के समय बड़े वादे होते हैं, लेकिन जीत के बाद कोई नहीं आता। बीडीओ से शिकायत की, पर आश्वासन ही मिला : मुखिया पंचायत के मुखिया जल सिंह बेसरा ने बताया कि उन्होंने कई बार बीडीओ से मिलकर शिकायत की। अधिकारियों को गांव बुलाया, निरीक्षण भी हुआ, आश्वासन मिला कि जल्द सड़क बनेगी। लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। गांव के लोग खुद आगे आए हैं। उन्होंने सड़क निर्माण के लिए अपनी जमीन दान देने का निर्णय लिया है। निष्पत्ति हांसदा ने कहा कि सड़क हमारे लिए सबसे जरूरी है। सरकार को जमीन चाहिए तो हम देने को तैयार हैं। ग्रामीण लिखित सहमति देने को भी तैयार हैं। फिर भी न जाने िकस कारण से सड़क नहीं बनाया जा रहा है। लोगों ने जल्द सड़क बनाने की मांग की है।


