बापू बरिंदर सिंह खालसा का निधन, समाज को अपूरणीय क्षति

लुधियाना| समाजसेवा और धार्मिक आस्था के प्रतीक बापू बरिंदर सिंह खालसा (प्रधान, सरगोधा एजुकेशन बोर्ड, खालसा सीमेंट वाले) के निधन से समाज को एक अपूरणीय क्षति हुई है। 27 फरवरी को उन्होंने इस नश्वर संसार को छोड़कर अकाल पुरख के चरणों में विलीन हो गए। उनके दिखाए मार्ग आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे। 1957 में जन्मे बापू बरिंदर सिंह खालसा का जीवन संघर्ष और सफलता की मिसाल रहा। पिता सरदार मेहताब सिंह परदेसी और माता रणजीत कौर के चार संतानों में वे सबसे छोटे थे, लेकिन हिम्मत, मेहनत और ईमानदारी के कारण उन्होंने समाज में अलग पहचान बनाई। कपड़ा व्यापार और चक्की संचालन से लेकर उन्होंने खालसा सीमेंट नाम से अपना व्यवसाय शुरू किया और उसे बुलंदियों तक पहुंचाया। 1982 में उनकी शादी सरदार देसा सिंह की बेटी कुलदीप कौर से हुई। उनके तीन पुत्र—गगनदीप सिंह, रमनदीप सिंह और इंद्रप्रीत सिंह—आज सफल व्यवसायी हैं और समाज में प्रतिष्ठित स्थान रखते हैं। हर संक्रांति पर गोनियाना मंडी में लंगर सेवा, हर हफ्ते गुरुद्वारा आलमगीर साहिब में सेवा, और संत-महापुरुषों के प्रति गहरी श्रद्धा उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा था। 8 मार्च, शनिवार को गुरुद्वारा सिंह सभा, मॉडल टाउन एक्सटेंशन में उनकी याद में समागम आयोजित किया जाएगा।

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