भास्कर न्यूज| बारां जिले में इस बार गेहूं की बुआई ने अब तक के सारे रिकार्ड को पीछे छोड़ दिया है। गत सालों की तुलना में इस बार 67 हजार हैक्टेयर में ज्यादा गेहूं बोया गया है जिससे दस लाख टन से अधिक उत्पादन का अनुमान है। इस रिकार्ड ने बारां जिले को राजस्थान के अग्रणी गेहूं उत्पादक जिलों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है। कृषि विभाग अधिकारियों के अनुसार इस सीजन में गेहूं की रिकार्ड 2.13 लाख हैक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई है। जो कि गत वर्ष की तुलना में करीब 67 हजार हैक्टेयर अधिक है। अगर मौसम का साथ रहा तो फसल में फलाव अच्छा रहेगा। करीब 50 क्विंटल प्रति हैक्टेयर के अनुमान से उत्पादन मिलने की उम्मीद है। जिससे 10 लाख 65 हजार मीट्रिक टन गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन रहने का अनुमान लगाया जा रहा हैं। गत वर्ष 1.46 लाख हैक्टेयर में ही गेहूं की बुवाई हुई थी। बीते दस वर्षों की तुलना की जाए तो सर्वाधिक बुवाई वर्ष 2019-20 में 1 लाख 81 हजार 699 हैक्टेयर में की गई थी। वहीं औसत उत्पादन 9 लाख 60 हजार मीट्रिक टन हुआ था। मौसम ने दिया साथ, तो अच्छी होगी पैदावार गेहूं की बुवाई अक्टूबर व नवंबर माह में होती है तथा कटाई मार्च, अप्रैल माह में शुरु हो जाती है। इसे ठंडे मौसम न्यूनतम 10 से लेकर 25 डिग्री तापमान और शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है। यह किसानों को अच्छा मुनाफा देने वाली फसल मानी जाती है। दिसंबर से मार्च के मध्य सर्दी के दौरान फसल बढ़ती है। मार्च से अप्रैल के मध्य फसल पकती है, और दाना भरता है। यूं तो गेहूं उत्पादन में उत्तर प्रदेश को देश में सर्वाधिक गेहूं उत्पादक राज्य माना जाता है। इसके बाद पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्य आते हैं। राजस्थान, बिहार तथा गुजरात भी गेहूं के प्रमुख उत्पादक राज्यों में गिने जाते हैं। जबकि विश्व स्तर पर चीन के बाद भारत दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश माना जाता है। एमएसपी बढ़ाने की मांग उठाई बारां मंडी में 2025 में गेहूं 5 लाख कट्टे तक आवक हुई थी, जबकि रकबा कम था। लेकिन इस बार रकबा बढ़ने से मंडी में बंपर आवक की संभावना है। इधर किसान संगठनों ने भी उत्पादन के साथ गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग की है। किसान महापंचायत के प्रदेश संयोजक सत्यनाराण सिंह ने बताया कि किसानों को उपज का उचित मूल्य मिले, यह सरकारों को तय करना चाहिए। वर्तमान में गेहूं की एमएसपी 2575 रुपए प्रति क्विंटल है। इसे बढ़ाकर 3 हजार रुपए प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए। स्टॉक क्षमता से इस साल भावों में स्थिरता कृषि उपज मंडी में गेहूं के प्रमुख व्यापारी विमल बंसल ने बताया कि सरकार ने गत दो तीन वर्षों से गेहूं की स्टॉक लिमिट तय कर दी है। जिसके कारण भावों में स्थिरता की स्थिति बनी रहती हैं। थोक व्यापारियों के लिए 30 हजार क्विंटल की लिमिट तय की हुई है। जिसके चलते कार्पोरेट कंपनियां भी बाजार में खुलकर नहीं उतर पाती हैं। अप्रैल, मई से लिमिट शुरु होकर जनवरी फरवरी तक बनी रहती हैं। इसके चलते थोक व्यापारी केवल खुला कारोबार ही कर पाते हैं।


